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Raksha Bandhan 2025: राखी बांधते समय इन नियमों का रखें ध्यान, भाई की उम्र होगी लंबी

Sat, 02 Aug 2025 06:31 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rakhi Bandhne Ke Niyam: रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन पूर्णिमा के दिन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसे मनाने के कुछ खास नियम और विधियां होती हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना गया है। 
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हर साल सावन पूर्णिमा के दिन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है - फोटो : amarujala
Raksha Bandhan Ke Niyam: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। यह दिन सिर्फ एक रक्षासूत्र बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बहन की दुआएं, भाई का वचन, और दोनों के बीच का भावनात्मक जुड़ाव समाया होता है। यह पर्व हर साल सावन पूर्णिमा के दिन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जब बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र, सुख-शांति की कामना करती हैं।
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हालांकि रक्षाबंधन की परंपरा सरल लग सकती है, लेकिन इसे मनाने के कुछ खास नियम और विधियां होती हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना गया है। इन नियमों का ध्यान रखने से इस त्योहार का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं वे महत्वपूर्ण बातें जिन्हें राखी बांधने से पहले जरूर ध्यान में रखना चाहिए, ताकि यह पर्व और भी शुभ और स्मरणीय बन सके।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर कब खत्म होगी भद्रा ? जानिए समय और राखी का शुभ मुहूर्त
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा शनिदेव की बहन थीं और उनका स्वभाव उग्र तथा अशुभ माना गया है। - फोटो : Freepik
राखी पर मुहूर्त का महत्व
हिंदू धर्म में शुभ कार्यों की एक विशेष समय-सारणी होती है जिसे "मुहूर्त" कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई भी धार्मिक या पारंपरिक कार्य सही मुहूर्त में किया जाए तो उसका फल कई गुना अधिक मिलता है। रक्षाबंधन जैसे पवित्र और भावनात्मक पर्व पर यह नियम और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुख, समृद्धि व लंबी उम्र की कामना करती हैं। लेकिन यह कार्य बिना विचार किए किसी भी समय नहीं करना चाहिए, विशेषकर भद्रा काल में तो बिल्कुल नहीं।
भद्रा काल एक विशेष समय अवधि होती है, जो पंचांग के अनुसार तय होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा शनिदेव की बहन थीं और उनका स्वभाव उग्र तथा अशुभ माना गया है। यह भी कहा जाता है कि भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य करने से उसका वांछित परिणाम नहीं मिलता, बल्कि कई बार विपरीत फल भी हो सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि रावण की बहन ने उसे रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल में राखी बांधी थी। इसके बाद रावण के जीवन में विनाशकारी घटनाएं घटित हुईं और अंततः उसका पतन हुआ। इस उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता।
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राखी को गंगाजल से शुद्ध करना एक बेहद महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है। - फोटो : Adobe
राखी बांधने से पहले करें ये काम
राखी को गंगाजल से शुद्ध करना एक बेहद महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है। गंगाजल न केवल शारीरिक रूप से शुद्ध करता है, बल्कि उसमें आध्यात्मिक और दैवीय गुण भी होते हैं, जो किसी भी वस्तु को पवित्र बना देते हैं। जब बहन राखी को गंगाजल से शुद्ध करती है, तो वह उसे नकारात्मकता से मुक्त कर, एक पवित्र और शक्तिशाली रक्षासूत्र में बदल देती है। यह राखी न केवल भाई की रक्षा करती है, बल्कि उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी लाती है।

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राखी बांधने का कार्य तभी करें जब मुहूर्त शुभ हो, ताकि भाई की उम्र, स्वास्थ्य, और जीवन में खुशहाली बनी रहे। - फोटो : Freepik
बहनों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
रक्षाबंधन के दिन जब बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने की तैयारी करें, तो सबसे पहले उन्हें उस दिन का पंचांग देखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह समय भद्रा काल से मुक्त हो। राखी बांधने का कार्य तभी करें जब मुहूर्त शुभ हो, ताकि भाई की उम्र, स्वास्थ्य, और जीवन में खुशहाली बनी रहे।
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राखी बांधने से पहले भाई के सिर पर एक रुमाल या कपड़ा रखें। फिर उसके माथे पर रोली, चंदन और अक्षत का तिलक लगाएं। - फोटो : Freepik
राखी बांधने के नियम
  • रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले उस जगह को अच्छे से साफ करें जहां आप अपने भाई को राखी बांधने वाली हैं। पवित्रता बनाए रखने के लिए आप वहां आटे या रंगोली से चौक (एक शुभ आकृति) भी बना सकती हैं।
  • अब एक पूजा की थाली तैयार करें जिसमें रोली (टीका लगाने वाला चंदन या कुमकुम), अक्षत (चावल), राखी, मिठाई और एक दीपक रखें। इसके बाद एक चौकी या आसन पर अपने भाई को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। आप खुद भी उसी दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • राखी बांधने से पहले भाई के सिर पर एक रुमाल या कपड़ा रखें। फिर उसके माथे पर रोली, चंदन और अक्षत का तिलक लगाएं। अब उसके दाहिने हाथ में राखी बांधें और राखी बांधते समय यह मंत्र बोलें: "ॐ येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:"
  • इसके बाद भाई को मिठाई खिलाएं और उसकी आरती उतारें। अंत में भाई को चाहिए कि वह बहन को प्रेमपूर्वक उपहार दे, जो धन, कपड़े या कोई भी वस्तु हो सकती है। यह पूरा विधान भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाता है।

 
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राखी पर शोभन योग का संयोग पर्व की महत्ता को और बढ़ा रहा है - फोटो : adobe stock
राखी बांधने का शुभ समय ?
ज्योतिषियों के अनुसार इस साल राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। यह मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक बना रहेगा। 

रक्षाबंधन पर इन शुभ योगों का संयोग 
सर्वार्थ सिद्धि योग: इस बार रक्षाबंधन के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहेगा। यह सुबह 5 बजकर 47 मिनट से दोपहर 2 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। 
सौभाग्य योग: राखी पर सौभाग्य योग प्रात:काल से लेकर 10 अगस्त को तड़के 2 बजकर 15 मिनट तक है।
शोभन योग:  राखी पर शोभन योग का संयोग पर्व की महत्ता को और बढ़ा रहा है। यह 10 अगस्त को तड़के 2 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 22 मिनट से 5 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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