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Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन कब है? जान लें राखी बांधने के शुभ मुहूर्त से लेकर भद्रा काल तक सबकुछ

Wed, 28 May 2025 01:25 PM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Raksha Bandha: रक्षाबंधन, भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार है, जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। श्रावण मास 11 जुलाई, 2025 को शुरू हो रहा है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में रक्षाबंधन को लेकर कई सवाल हैं। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
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रक्षाबंधन - फोटो : Amar Ujala
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है जो हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जिसमें बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी आयु और खुशहाली की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं और उपहार भेंट करते हैं। अक्सर लोगों को राखी बांधने के शुभ मुहूर्त को लेकर कई सवाल होते हैं। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधने को अशुभ माना गया है। ऐसे में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त जानना बहुत जरूरी होता है। इसलिए साल 2025 में रक्षाबंधन कब मनाया जाएगा, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है, और इस पर्व से जुड़ी अन्य खास सवालों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

रक्षाबंधन 2025 की तारीख और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन 2025 में 9 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त 2025 को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और 9 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। 
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रक्षाबंधन - फोटो : Amar Ujala
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
अब आइए जानते हैं कि राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है? रक्षाबंधन के दिन यानी 9 अगस्त 2025 दिन शनिवार को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
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रक्षाबंधन - फोटो : freepik
भद्रा काल का प्रभाव
हिंदू मान्यताओं में भद्रा काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है, और राखी बांधना भी इस दौरान अशुभ होता है। अच्छी बात यह है कि 2025 में रक्षाबंधन पर भद्रा का साया ना के बराबर रहेगा। भद्रा काल 9 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, जिसका मतलब है कि बहनें बिना किसी चिंता के पूरे दिन राखी बांध सकती हैं।
 

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रक्षाबंधन - फोटो : Amar Ujala
कई लोगों के मन में भद्रा काल को लेकर कई सवाल रहते हैं, इसलिए आइए भद्रा काल के समय के बारे में जानते हैं। रक्षाबंधन 2025 के दौरान भद्रा काल पूर्णिमा तिथि के साथ शुरू होगा, यानी 08 अगस्त 2025 को दोपहर 02:12 बजे से। यह समय रक्षाबंधन से एक दिन पहले है। भद्रा काल की समाप्ति 08 अगस्त 2025 को मध्य रात्रि 01:52 बजे होगी। इसका मतलब है कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले खत्म हो जाएगा, और पूरा दिन दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक बहनें बिना चिंता के राखी बांध सकती हैं।

 
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रक्षाबंधन - फोटो : freepik
शुभ योग और उनका महत्व
इस साल रक्षाबंधन पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जो इस पर्व को और भी खास बनाते हैं। सौभाग्य योग, शोभन योग, और सर्वार्थ सिद्धि योग इस दिन मौजूद होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन योगों में किए गए कार्य शुभ फलदायी होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 22 मिनट से 5 बजकर 04 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
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रक्षाबंधन - फोटो : Freepik
राखी बांधने की विधि
रक्षाबंधन के दिन बहनें स्नान कर एक थाली में राखी, रोली, चावल, मिठाई और दीया सजाती हैं। भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर, उनकी आरती उतारती हैं और राखी बांधती हैं। इस दौरान बहनों को ये मंत्र पढ़ना चाहिए। ये मंत्र पढ़ने से भाई-बहन दोनों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है, और सुखमय जीवन व्यतीत करते हैं।
"येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।" 
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रक्षाबंधन - फोटो : Freepik
रक्षाबंधन का महत्व और परंपरा
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का वचन देते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की उंगली पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था, तब श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया था। रक्षाबंधन न केवल रक्तसंबंधी रिश्तों तक सीमित है, बल्कि यह दोस्ती और एकता का भी प्रतीक है।
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