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Pradosh Vrat: कब है नवंबर का अगला प्रदोष व्रत, जानें तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

Mon, 10 Nov 2025 01:06 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pradosh Vrat November 2025: इस बार नवंबर महीने में यह संयोग बन रहा है कि दूसरा प्रदोष व्रत भी सोमवार को ही पड़ने वाला है। आइए जानते हैं नवंबर के दूसरे सोम प्रदोष व्रत की तिथि, पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।
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Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
November ka dusra pradosh kab hai 2025: हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन शिव भक्त उपवास रखकर विशेष विधि से पूजा-अर्चना करते हैं ताकि भोलेनाथ को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाते हैं। जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो यह और भी अधिक शुभ माना जाता है। इस बार नवंबर महीने में यह संयोग बन रहा है कि दूसरा प्रदोष व्रत भी सोमवार को ही पड़ने वाला है। आइए जानते हैं नवंबर के दूसरे सोम प्रदोष व्रत की तिथि, पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।

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Ravi Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
नवंबर महीने का दूसरे प्रदोष व्रत
पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 17 नवंबर की सुबह 04:47 बजे होगी और 18 नवंबर की सुबह 07:12 बजे इसका समापन होगा। ऐसे में नवंबर का दूसरा प्रदोष व्रत 17 नवंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ समय प्रदोष काल को माना जाता है। इस दिन शाम 05:27 बजे से 08:06 बजे तक प्रदोष काल रहेगा।
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mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
सोम प्रदोष व्रत के लाभ
सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है, क्योंकि सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित हैं। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्र देवता की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। 

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mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र देव मन के कारक ग्रह होते हैं। उनकी कृपा से मानसिक शांति, सुख और वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति होती है। सोम प्रदोष व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
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mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन से दुख, दोष और बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसा माना जाता है कि प्रदोष व्रत के प्रभाव से ऋण, रोग और संकट शीघ्र समाप्त हो जाते हैं और सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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