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Pitru Paksha 2025: पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए श्राद्ध पक्ष में करें यह सरल उपाय, पूरे होंगे सभी अटके काम

Tue, 09 Sep 2025 12:58 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pitru Suktam Path in Pitru Paksha 2025: हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होती है और यह आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इस वर्ष पितृपक्ष का आरंभ 7 सितंबर 2025, रविवार से हो चुका है। 
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Pitru Suktam Path in Pitru Paksha 2025
Pitru Suktam Path in Pitru Paksha 2025: हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होती है और यह आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इस वर्ष पितृपक्ष का आरंभ 7 सितंबर 2025, रविवार से हो चुका है। इस अवधि में पूर्वजों की आत्मशांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए घरों में श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। हालांकि, इन सभी में पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज का विशेष महत्व माना जाता है। इसके प्रभाव से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। कहते हैं कि पितृपक्ष के इन 16 दिनों में पितृ अपने वंशजों के लिए आशीर्वाद देने धरती पर आते हैं। इसलिए धूपदान, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य जैसे शुभ कार्य करने से पितृदोषों से मुक्ति मिलती हैं। साथ ही, पितृ सूक्त का पाठ करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और जीवन से नकारात्मकता दूर होती हैं। इससे अटके हुए कार्य भी धीरे-धीरे सफल होने लगते हैं। आइए इस शक्तिशाली पाठ के बारे में जानते हैं।
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Pitru Suktam Path in Pitru Paksha 2025 - फोटो : adobe stock
पितृ सूक्तम् का पाठ
उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।
असुम् यऽ ईयुर-वृका ॠतज्ञास्ते नो ऽवन्तु पितरो हवेषु॥

अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः।
तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानाम् अपि भद्रे सौमनसे स्याम्॥

ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासो ऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः।
तेभिर यमः सरराणो हवीष्य उशन्न उशद्भिः प्रतिकामम् अत्तु॥

त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठम् अनु नेषि पंथाम्।
तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नम् अभजन्त धीराः॥

त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः।
वन्वन् अवातः परिधीन् ऽरपोर्णु वीरेभिः अश्वैः मघवा भवा नः॥

त्वं सोम पितृभिः संविदानो ऽनु द्यावा-पृथिवीऽ आ ततन्थ।
तस्मै तऽ इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥

बर्हिषदः पितरः ऊत्य-र्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम्।
तऽ आगत अवसा शन्तमे नाथा नः शंयोर ऽरपो दधात॥

आहं पितृन्त् सुविदत्रान् ऽअवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः।
बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वः तऽ इहागमिष्ठाः॥

उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।
तऽ आ गमन्तु तऽ इह श्रुवन्तु अधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥

आ यन्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभि-र्देवयानैः।
अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥

अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सु-प्रणीतयः।
अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्य-था रयिम् सर्व-वीरं दधातन॥

येऽ अग्निष्वात्ता येऽ अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते।
तेभ्यः स्वराड-सुनीतिम् एताम् यथा-वशं तन्वं कल्पयाति॥

अग्निष्वात्तान् ॠतुमतो हवामहे नाराशं-से सोमपीथं यऽ आशुः।
ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥

आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे।
मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम॥

आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे मर्त्याय।
पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात॥
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Pitru Suktam Path in Pitru Paksha 2025 - फोटो : freepik
पितरों के लिए तर्पण देने के मंत्र
  • ओम पितृ देवतायै नमः
  • ओम पितृभ्यः स्वधा नमः
  • ओम सर्वपितृभ्यः स्वधा नमः

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Pitru Suktam Path in Pitru Paksha 2025 - फोटो : सोशल मीडिया
ॐ नमो व: पितरो रसाय नमो व:
पितर: शोषाय नमो व:
पितरो जीवाय नमो व:
पीतर: स्वधायै नमो व:
पितर: पितरो नमो वो
गृहान्न: पितरो दत्त:सत्तो व:।।
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Pitru Suktam Path in Pitru Paksha 2025 - फोटो : freepik
पितृभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
पितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
प्रपितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
सर्व पितृभ्यो श्र्द्ध्या नमो नम:।।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 


 
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