पिठोरी अमावस्या का महत्व
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पिठोरी अमावस्या का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पिठोरी अमावस्या का महत्व बेहद गहरा है। कहा जाता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान इंद्र की पत्नी को इस व्रत और कथा का महत्व बताया था। धार्मिक मान्यताओं में यह दिन विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति और परिवार की समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पिठोरी अमावस्या का व्रत करने से बुद्धिमान, बलवान और सद्गुणी संतान की प्राप्ति होती है।
इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जरूरतमंदों को भोजन कराना, वस्त्र, अन्न या धन का दान करना पितरों के आशीर्वाद को प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। साथ ही, इस दिन किसी पेड़ के नीचे दीपक जलाकर उसकी सात या ग्यारह बार परिक्रमा करने से जीवन में शांति, सौभाग्य और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार, पिठोरी अमावस्या न केवल पितरों की तृप्ति के लिए बल्कि अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भरने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।