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Paush Putrada Ekadashi 2025: शुभ योग में साल की अंतिम एकादशी, जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

Wed, 17 Dec 2025 03:14 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Paush Putrada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह पौष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाती है। इस दिन सृष्टि के पालनहार विष्णु जी की पूजा की जाती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में बदलाव आते हैं और उसे मोक्ष मिलता है। 
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Putrada Ekadashi 2025 - फोटो : Amar Ujala
Paush Putrada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह पौष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाती है। इस दिन सृष्टि के पालनहार विष्णु जी की पूजा की जाती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में बदलाव आते हैं और उसे मोक्ष मिलता है। यह व्रत सुहागिनों के लिए बेहद लाभकारी होता है, क्योंकि इस दिन देवी लक्ष्मी संग विष्णु महाराज का स्मरण करने से पुत्र प्राप्ति के योग का निर्माण होता है। मान्यता है कि, पुत्रदा एकादशी पर विष्णु जी को केसर की खीर का भोग लगाने से संतान की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यहीं नहीं जातकों का भाग्योदय भी होता है। इस वर्ष 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। यह साल की अंतिम एकादशी होगी। ऐसे में आइए इस दिन के पूजा मुहूर्त और शुभ योग को जानते हैं।
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Paush Putrada Ekadashi 2025 - फोटो : Adobe Stock
पौष पुत्रदा एकादशी 2025
इस वर्ष पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 31 दिसंबर की सुबह 5 बजे होगा। इसलिए 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन भरणी नक्षत्र और सिद्ध का विशेष संयोग बना रहेगा।
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Paush Putrada Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
पूजा का शुभ मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 5:24 से 06:19
  • प्रातः सन्ध्या- सुबह में 5:51 से 07:13
  • अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12:3 से 12:44
  • विजय मुहूर्त- दोपहर में 2:07 से 02:49
  • निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:51

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Paush Putrada Ekadashi 2025 - फोटो : Adobe Stock
एकादशी व्रत पूजा विधि 
  • एकादशी के दिन एक साफ चौकी पर विष्णु जी की मूर्ति रखें।
  • प्रभु को पीले रंग के वस्त्र पहनाएं।
  • प्रभु के सामने शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं और उन्हें चने की दाल अर्पित करें।
  • इस दौरान प्रभु को पंचामृत का भोग लगाएं और उसमें तुलसी दल शामिल अवश्य करें।
  • विष्णु जी को बेसन के लड्डू और पीली मिठाई भी चढ़ाएं।
  • अब आप एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। 
  • विष्णु जी की आरती करें और जरूरतमंदों को दान दें।
  • रात में कीर्तन या भजन गाकर प्रभु की कृपा प्राप्त करें।
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Paush Putrada Ekadashi 2025 - फोटो : Adobe Stock
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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