बुध प्रदोष व्रत कथा
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यह दृश्य देखकर उस व्यक्ति की आंखें भर आईं। उसने वहीं भगवान शिव से विनती की, हे प्रभु! मेरी पत्नी की रक्षा कीजिए। मुझसे बड़ी भूल हो गई जो मैंने बुधवार के दिन उसे विदा कराया। आगे से ऐसी गलती कभी नहीं करूंगा। उसकी प्रार्थना पूर्ण होते ही वह दूसरा व्यक्ति अदृश्य हो गया। इसके बाद वह व्यक्ति सकुशल अपनी पत्नी के साथ घर लौट आया। इस घटना के बाद पति-पत्नी ने जीवन भर श्रद्धा और नियम के साथ बुध प्रदोष व्रत करना प्रारंभ किया।
भगवान शिव की जय।
माता पार्वती की जय।
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