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Papmochani Ekadashi Vrat Katha: पापमोचिनी एकादशी व्रत में करें इस कथा का पाठ, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति

Sun, 15 Mar 2026 08:00 AM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Ekadashi Vrat Katha: इस बार पापमोचिनी एकादशी 15 मार्च, रविवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा का पाठ करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मकता आती है। आइए जानते हैं पापमोचिनी एकादशी की व्रत कथा....
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पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा - फोटो : Amar Ujala
Papmochani Ekadashi Vrat Katha In Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की श्रद्धा से पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत महाभारत काल से किया जाता रहा है। साल 2026 में पापमोचिनी एकादशी 15 मार्च, रविवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा का पाठ करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मकता आती है। आइए जानते हैं पापमोचिनी एकादशी की व्रत कथा....

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पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe stock
पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का महत्व स्वयं ब्रह्मा जी ने बताया था। कथा के अनुसार भगवान श्रीहरि ने कहा कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और इसे सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। इस एकादशी के महात्म्य का श्रवण या पाठ करने से भी पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

एक बार देवर्षि नारद ने ब्रह्मा जी से चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का महत्व जानने की इच्छा व्यक्त की। तब ब्रह्मा जी ने उन्हें पापमोचिनी एकादशी की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में चित्ररथ नाम का एक सुंदर वन था, जहां देवराज इंद्र देवताओं और गंधर्वों के साथ विहार करते थे।
 
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पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe stock
उसी वन में मेधावी नाम के एक ऋषि कठोर तपस्या कर रहे थे। वे भगवान शिव के भक्त थे। उसी समय कामदेव ने उनकी तपस्या भंग करने के उद्देश्य से मंजुघोषा नाम की एक अप्सरा को वहां भेजा। मंजुघोषा ने अपने नृत्य, गीत और हाव-भाव से ऋषि का मन मोहित कर लिया। परिणामस्वरूप ऋषि तपस्या भूलकर उसके साथ रहने लगे और इस तरह 57 वर्ष बीत गए।

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पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe stock
एक दिन मंजुघोषा ने देवलोक लौटने की अनुमति मांगी। तब ऋषि को अपनी भूल का एहसास हुआ और क्रोधित होकर उन्होंने अप्सरा को पिशाचनी बनने का श्राप दे दिया। श्राप से भयभीत मंजुघोषा ने उनसे मुक्ति का उपाय पूछा। तब ऋषि ने उसे पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

इसके बाद ऋषि अपने पिता च्यवन ऋषि के आश्रम चले गए। जब च्यवन ऋषि को इस घटना का पता चला तो उन्होंने अपने पुत्र को भी पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के प्रभाव से मंजुघोषा पिशाचनी योनि से मुक्त होकर पुनः देवलोक चली गई।
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पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe stock
इस कथा के अनुसार जो भी व्यक्ति श्रद्धा और विधि-विधान से पापमोचिनी एकादशी का व्रत करता है या इसकी कथा को पढ़ता और सुनता है, उसके पाप नष्ट होते हैं और जीवन के कष्ट दूर होने की मान्यता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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