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Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी पर विष्णु जी को लगाएं इन 3 चीजों का भोग, सभी दुखों का होगा निवारण

Fri, 03 Oct 2025 06:37 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Papankusha Ekadashi 2025: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर 'पापांकुशा एकादशी' का उपवास किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का विधान है, जिसके प्रभाव से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
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Papankusha Ekadashi 2025 - फोटो : अमर उजाला
Papankusha Ekadashi 2025: हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर 'पापांकुशा एकादशी' का उपवास किया जाता है। इस दिन सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस दिन उपवास रखने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही नहीं जाने अनजाने में हुई गलतियों के परिणामों से भी छुटकारा मिलता है। शास्त्रों में भी एकादशी के महत्व का उल्लेख है। माना जाता है कि इस दिन पीली चीजों का दान, प्रभु के नामों का जाप, भजन-कीर्तन जैसे कार्य करने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं। हालांकि, प्रभु को इस दिन कुछ विशेष चीजों का भोग लगाने पर वह प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा विवाह, करियर, नौकरी, परीक्षा सहित व्यापार की परेशानियां भी श्री हरि स्वयं दूर करते हैं। इस वर्ष पापांकुशा एकादशी का व्रत 3 अक्तूबर को रखा जा रहा है। इस तिथि पर श्रवण नक्षत्र और धृति योग का संयोग रहने वाला है। ऐसे में इन चीजों का भोग लगाना कल्याणकारी हो सकता है। ऐसे में आइए इसके बारे में जानते हैं।
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Papankusha Ekadashi 2025 - फोटो : freepik
पापांकुशा एकादशी 2025 
  • आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 2 अक्तूबर को शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। 
  • इसका समापन 3 अक्तूबर 2025 को शाम 6 बजकर 33 मिनट पर है। 
  • ऐसे में पापांकुशा एकादशी का व्रत 3 अक्तूबर को रखा जाएगा। 
  • 4 अक्तूबर 2025 को सुबह 06:23 मिनट से 8:44 मिनट तक आप व्रत का पारण कर सकते हैं
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Papankusha Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
एकादशी पर लगाएं भगवान विष्णु को ये भोग

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आप एकादशी तिथि पर विष्णु जी को पंचामृत का भोग लगाएं। यह पंचामृत दूध, दही, शहद, चीनी और घी के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो प्रभु को अति प्रिय है। इसके प्रभाव से वह प्रसन्न होकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

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Papankusha Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
  • भगवान विष्णु को आप धनिया और सूखे मेवों से बनी पंजीरी का भोग भी लगा सकते हैं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • एकादशी के दिन भगवान विष्णु को मखाने की खीर का भोग लगाएं। आप तुलसी पत्र डालकर प्रभु को भोग लगाएं। इससे आर्थिक लाभ होता है।
 

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Papankusha Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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