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Karwa Chauth 2025: करवा चौथ में क्यों करते हैं चंद्रमा की पूजा, जानें चंद्र पूजन का महत्व

Thu, 02 Oct 2025 03:54 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chandra Puja Siginificnce: करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य  देकर व्रत का पारण किया जाता है। आइए जानते हैं करवा चौथ पर चाँद की पूजा क्यों की जाती है।
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करवा चौथ पूजन - फोटो : अमर उजाला
Karwa Chauth Chand Puja Importance: करवा चौथ उत्तर भारत का एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार है, जिसे मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं मनाती हैं। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हुए सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक व्रत रखती हैं। व्रत के दौरान वे भोजन और जल का त्याग कर कठोर उपवास करती हैं, जो उनके समर्पण और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
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त्योहार के दिन महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और पूजा-अर्चना में भाग लेती हैं। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद, वे चंद्रमा को जल अर्पित करती हैं और फिर अपने पति के हाथों से जल और भोजन ग्रहण करके व्रत तोड़ती हैं। करवा चौथ का यह अनुष्ठान विवाहित जीवन में प्रेम, विश्वास और एकता को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है। करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य  देकर व्रत का पारण किया जाता है। आइए जानते हैं करवा चौथ पर चाँद की पूजा क्यों की जाती है।
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ऐसा माना जाता है कि इस पूजा से जीवन में लंबी उम्र, शांति और समृद्धि आती है। - फोटो : instagram
करवा चौथ पर चंद्रमा पूजा का महत्व
करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा का खास महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा से जीवन में लंबी उम्र, शांति और समृद्धि आती है। हिंदू धर्म में चंद्रमा को शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन महिलाएं चंद्रमा की पूजा करके व्रत खोलती हैं और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
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चंद्रमा का धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध - फोटो : अमर उजाला
चंद्रमा का धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध
कथा के अनुसार, चंद्रमा भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा हुआ है, जो शादी के पवित्र बंधन का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा की ठंडी और शांत ऊर्जा मन को शांति देती है, जिससे प्रार्थना और ध्यान के लिए यह समय बहुत शुभ माना जाता है।

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Karwa Chauth 2025 - फोटो : Freepik
चंद्रमा को जल अर्पित करने का महत्व
पूजा के दौरान चंद्रमा को जल अर्पित करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं, और इससे दंपत्ति के बीच आध्यात्मिक संबंध भी मजबूत होता है।
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करवा चौथ पर चंद्र पूजा का आध्यात्मिक महत्व - फोटो : Adobe
करवा चौथ पर चंद्र पूजा का आध्यात्मिक महत्व
करवा चौथ पर चंद्र पूजा न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि पति-पत्नी के प्रेम और विश्वास को भी गहरा करती है। यह पूजा दंपत्ति के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक सुंदर तरीका है।
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कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर 2025, गुरुवार को रात 10 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को शाम 7 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। - फोटो : freepik
करवा चौथ कब?
वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर 2025, गुरुवार को रात 10 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को शाम 7 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 10 अक्टूबर को ही होगा, इसलिए करवा चौथ का व्रत इसी दिन, शुक्रवार को रखा जाएगा। करवा चौथ पूजा का शुभ समय शाम 5:57 बजे से शाम 7:11 बजे तक रहेगा। वहीं, चंद्रमा के उदय का समय लगभग रात 8:13 बजे होगा, जिसके बाद महिलाएं व्रत खोलती हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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