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Onam Festival 2022: ओणम आज, जानिए इस पर्व का महत्व, कथा और खास बातें

Thu, 08 Sep 2022 05:36 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ओणम का महत्व और इससे जुड़ी कथा - फोटो : iStock
Onam Festival 2022 Date:आज गुरुवार, 8 सितंबर को ओणम का पर्व मनाया जा रहा है। ओणम का ये पर्व दक्षिण भारत, खासतौर पर केरल राज्य में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ये त्योहार 10 दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत इस साल 30 अगस्त से हुई थी। ओणम का पर्व मलयालम सोलर कैलेंडर के अनुसार चिंगम महीने में मनाया जाता है। ये मलयालम कैलेंडर का पहला महिना होता है, जो ज्यादातर अगस्त-सितंबर महीने के बीच में आता है। मान्यताओं के अनुसार, ओणम यानी थिरुओणम के दिन ही राजा महाबली अपनी समस्त प्रजा से मिलने के लिए आते हैं, जिसकी खुशी में ये त्योहार मनाया जाता है। केरल राज्य में इसका अलग ही महत्व देखने को मिलता है। इस पावन पर्व को मनाने के लिए देश-विदेश तक के लोग आते हैं। तो आइए जानते हैं ओणम पर्व के बारे में खास बातें.... 
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ओणम का महत्व और इससे जुड़ी कथा - फोटो : iStock
दस दिनों तक चलता है ये पर्व 
ये पर्व पूरे दस दिनों तक चलता है। इसके प्रथम दिन को अथम और दसवें दिन को थीरुओणम कहा जाता है। ये उल्लास, उमंग और परंपराओं से भरा हुआ त्योहार है। कहा  जाता है कि किसान नए फसल के बेहतर उपज के लिए ये त्योहार मनाते हैं। इस दिन केरल में प्रसिद्ध सर्प नौका दौड़ और कथकली नृत्य का आयोजन किया जाता है।  
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ओणम का महत्व और इससे जुड़ी कथा - फोटो : iStock
राजा बलि के स्वागत में मनाया जाता है ओणम
दक्षिण भारत राज्यों में ओणम का ये पर्व महाबली राजा बलि के स्वागत में मनाया जाता है। कहा जाता है कि राजा बलि असुराज होने के बावजूद भी भगवान विष्णु के भक्त थे। इस त्योहार की कथा भी विष्णु जी के वामन अवतार से जुड़ी है। मान्यता है कि साल में एक बार पाताल लोक से राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने धरती लोक पर आते हैं। इस दिन वामन अवतार और राजा बलि की पूजा के साथ उनका स्वागत किया जाता है। 

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ओणम का महत्व और इससे जुड़ी कथा - फोटो : pixabay
जब राजा बलि ने किया यज्ञ
राजा बलि महान दानी थे, उनके पास से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता था। लेकिन वे देवताओं को अपना शत्रु मानते थे। एक बार उन्होंने स्वर्ग पर अधिकार करने के लिए विशाल यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य मुख्य पुरोहित थे। देवताओं को जब पता चला कि स्वर्ग पर अधिकार करने के लिए बलि यज्ञ कर रहे हैं तो वे भगवान विष्णु के पास गए। 
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ओणम का महत्व और इससे जुड़ी कथा - फोटो : pixabay
देवताओं की सहायता के लिए भगवान विष्णु वामन रूप में राजा बलि के पास गए और उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी। दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने उसे भगवान विष्णु की लीला से अवगत भी करवाया, लेकिन फिर भी राजा बलि ने वामन स्वरूप भगवान विष्णु को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया। दो पगों में ही भगवान विष्णु ने समस्त लोकों को नाप दिया। तीसरे पग के लिये कुछ नहीं बचा तो बलि ने अपना वचन पूरा करते हुए अपना शीष उनके पग के नीचे कर दिया। भगवान विष्णु की कृपा से राजा बलि पाताल लोक में रहने लगे और हर साल थिरुवोनम के दिन अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। 
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