मां चंद्रघंटा की व्रत कथा
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मां चंद्रघंटा की व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब असुरराज महिषासुर ने तीनों लोकों में अत्याचार शुरू कर दिया और स्वर्गलोक पर अधिकार करने की ठान ली, तब सभी देवता भयभीत होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुंचे। देवताओं की व्यथा सुनकर तीनों देव अत्यंत क्रोधित हो उठे। उनके तेज और ऊर्जा के सम्मिलन से एक दिव्य देवी का प्राकट्य हुआ।
इस देवी को सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र प्रदान किए, भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र, इंद्रदेव ने घंटा, सूर्यदेव ने अपना प्रकाश और अन्य देवताओं ने भी अपने-अपने शस्त्र सौंप दिए। इन दिव्य शक्तियों से संपन्न होकर मां चंद्रघंटा ने महिषासुर से युद्ध किया और उसका वध कर दिया। देवताओं ने उनके इस पराक्रम के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। इस प्रकार मां चंद्रघंटा ने देवताओं और समस्त लोकों को महिषासुर के आतंक से मुक्ति दिलाई।