नवरात्रि मां ब्रह्मचारिणी
- फोटो : Amar Ujala
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
ब्रह्मचारिणी को माता दुर्गा का दूसरा रूप माना जाता है, जिसकी पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। यह देवी पार्वती का वह स्वरूप है, जब उनका विवाह भगवान शिव से नहीं हुआ था। इस रूप में उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। ब्रह्मचारिणी देवी सच्चे प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक मानी जाती हैं। भगवान शिव को पाने की उनकी इच्छा ने उन्हें हजारों वर्षों तक तप करने की शक्ति और दृढ़ता दी।
माता ब्रह्मचारिणी एक तपस्विनी कन्या के रूप में दिखाई देती हैं। वह नंगे पांव चलती हैं और उनके एक हाथ में जपमाला तथा दूसरे हाथ में कमंडल होता है। उनका सरल स्वरूप सादगी भरे जीवन, भक्ति, आत्मबल और ध्यान का प्रतीक है। उनका प्रिय रंग सफेद माना जाता है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक है। उनका प्रिय फूल गुलदाउदी है। वाराणसी के पंचगंगा घाट, घासी टोला में उनका एक प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है।