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Navratri 8th day : 20 अप्रैल को अष्टमी तिथि, धन-धान्य और सुख-समृद्धि के लिए मां गौरी की करें उपासना

Tue, 20 Apr 2021 06:43 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
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navratri 2021 - फोटो : अमर उजाला
आदिशक्ति श्री दुर्गाजी का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं,नवरात्रि के आठवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। उपासक सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है। उसके पूर्व संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं और भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दुःख उसके पास कभी नहीं रहते।
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मां महागौरी - फोटो : SELF
अत्यंत आकर्षक है इनका स्वरूप
इनका वर्ण पूर्ण रूप से गौर है ,इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। इनकी गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से की गई है एवं इनकी आयु आठ वर्ष की मानी हुई है। इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। वृषभ पर सवार मां की चार भुजाएं हैं जिसमें ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर मुद्रा है एवं इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है। मां महागौरी का ध्यान-स्मरण, पूजन-आराधना भक्तों के लिए सर्वाधिक कल्याणकारी है। मनुष्य को सदैव इनका ध्यान करना चाहिए, इनकी कृपा से आलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। ये भक्तों के कष्ट जल्दी ही दूर कर देती हैं एवं इनकी उपासना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। ये मनुष्य की वृतियों को सत की ओर प्रेरित करके असत का विनाश करती हैं । भक्तों के लिए यह देवी अन्नपूर्णा का स्वरुप हैं इसलिए अष्टमी के दिन कन्याओं के पूजन का विधान है। ये धन,वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। धन-धन्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए माँ गौरी की उपासना की जानी चाहिए।
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kanya pujan
पार्वती रूप में की शिवजी की तपस्या
अपने पार्वती रूप में इन्होने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बड़ी कठोर तपस्या की थी। गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार भी इन्होंने भगवान शिव के वरण के लिए अत्यंत कठोर संकल्प लिया था-
जन्म कोटि लगि रैगर हमारी
बरउँ संभु न त रहउ कुंआरी

इस कठोर तपस्या के कारण इनका शरीर एकदम काला पड़ गया। इनकी तपस्या से प्रसन्न और संतुष्ट होकर जब भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा जी के पवित्र जल से मलकर धोया तब बह विद्युत प्रभा के समान अत्यंत कांतिमान-गौर हो उठा और तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा।
 
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kanya pujan
मां महागौरी की पूजन विधि
अष्टमी तिथि के दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात् कलश पूजन के पश्चात् मां की विधि-विधान से पूजा करें। इस दिन मां को सफेद पुष्प अर्पित करें, मां की वंदना मंत्र का उच्चारण करें। आज के दिन माँ को हलुआ, पूरी, सब्जी, काले चने एवं नारियल का भोग लगाएं। माता रानी को चुनरी अर्पित करें। अगर आपके घर अष्टमी पूजी जाती है तो आप पूजा के बाद कन्याओं को भोजन भी करा सकते हैं ये शुभ फल देने वाला माना गया है।

आराधना मंत्र-
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
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