navratri 2020
चतुर्थ कूष्माण्डा
नवरात्रि के चौथे दिन शेर पर सवार माँ के कूष्माण्डा स्वरूप की पूजा की जाती हैं। अपनी मंद हल्की हंसी द्वारा ब्रह्माण्ड को उत्पंन करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है।जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था,चारों ओर अंधकार ही अंधकार परिव्याप्त था,तब इन्हीं देवी ने अपने 'ईषत' हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी अतः यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा,आदि शक्ति हैं।इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं ।अष्ट भुजाओं वाली देवी के सात हाथों में क्रमशः कमंडल,धनुष,बाण,कमलपुष्प,अमृतपूर्ण कलश,चक्र तथा गदा है।आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है।देवी कूष्मांडा अपने भक्तों को रोग,शोक और विनाश से मुक्त करके आयु,यश,बल और बुद्धि प्रदान करती हैं।