पुराणों के अनुसार महर्षि नारद का जन्म भगवान ब्रह्राा जी की गोद से हुआ था इसलिए इन्हें ब्रह्रााजी के मानस पुत्र की माना गया है। नारद जी का सम्मान ना सिर्फ देवी-देवता करते थे बल्कि ऋषि और असुर भी करते थे। नारद जी भगवान विष्णु के परम भक्त थे और वे हमेशा नारायण-नारायण का जप करते रहते थे। नारद जी को मिले श्राप के कारण वह कभी एक स्थान पर नहीं टिकते थे।