सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का व्रत मनाया जाएगा जोकि इस बार 27 जुलाई को है। बंगाल और राजस्थान में यह व्रत 14 जुलाई यानि कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जा चुका हैं। पुराणों में नागपंचमी को मनाने के पीछे कई मान्यताएं प्रचलित है।
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ऐसी मान्यता है कि सावन महीने की पंचमी तिथि को नाग ब्रह्राजी के पास अपने को श्राप से मुक्ति दिलाने के उनसे मिलने गए थे। तब ब्रह्राजी ने नागों को श्राप से मुक्ति किया था, तभी से नागों का पूजन की करने की परम्परा है।
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वहीं एक दूसरी कथा प्रचलित है जहां पर ब्रह्राजी ने धरती का भार उठाने के लिए नागों को शेषनाग से अलंकृत किया था तभी से नाग देवता की पूजा की जाती है।
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भगवान श्री कृष्ण ने सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को कालिया नाग का वध करके गोकुल वासियो की जान बचाई थी। तभी से नागों की पूजा करने की परम्परा चल रही है।
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समुद्र मंथन में वासुकि नाग को रस्सी के रुप में प्रयोग किया गया था। इस कारण से भी नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है।
मान्यता है कि एक किसान के दो बेटे तथा एक पुत्री थी, एक दिन हल चलाते समय उसने सांप के 3 बच्चों को हल से रौंदकर मार डाला, नागिन बच्चों के दुख में बहुत दुखी हुई, उस ने बदला लेने के लिए रात को जाकर किसान की पत्नी और उसके दोनों बेटों को डस लिया तथा अगले दिन वह उसकी बेटी को डंसने गई तो किसान की बेटी ने उसे दूध पिलाया तथा अपने माता-पिता को माफ करने के लिए प्रार्थना की। नागमाता प्रसन्न हुई तथा उसने सभी को जीवन दान दिया।