भगवान श्री कृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया फिर श्री कृष्ण देवकी के पुत्र की बजाय यशोदा के लल्ला कहलाते हैं। दरअसल ऐसा होना श्री कृष्ण के जन्म से पहले ही तय हो चुका था। इसलिए देवकी ने भी अपने पुत्र श्री कृष्ण को हमेशा यशोदा के लल्ला कहकर ही पुकारा।
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देवकी के गर्भ से जन्म लेने के बाद भी श्री कृष्ण इसलिए कहलाए यशोदा के नंदलाल
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जनमाष्टमी
श्री कृष्ण का देवकी के गर्भ से जन्म लेना पूर्वजन्म के वरदान का परिणाम था। कैकेयी ने भगवान राम को वनवास भेजा लेकिन राम वनवास से लौटने के बाद भी देवी कैकेयी के प्रति स्नेह भाव रखते भगवान राम की इस उदारता को देखकर देवी कैकेयी ने राम से कहा कि पुत्र अगले जन्म में तुम मेरे गर्भ से जन्म लेकर मुझे अपनी माता बनने का सौभाग्य प्रदान करो। राम ने माता की इस इच्छा को पूर्ण करने के लिए कि अगले जन्म में ऐसा ही होगा।
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देवकी के गर्भ से जन्म लेने के बाद भी श्री कृष्ण इसलिए कहलाए यशोदा के नंदलाल
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राम सीता
लेकिन कौशल्या का पुण्य कहीं साथ ही राम अपनी माता कौशल्या को भी निराश नहीं करना चाहते थे। इसलिए राम ने कहा कि भले ही मैं माता कैकेयी का पुत्र बनकर अगला जन्म लूंगा लेकिन मैं आपका ही पुत्र कहलाऊंगा।
देवकी के गर्भ से जन्म लेने के बाद भी श्री कृष्ण इसलिए कहलाए यशोदा के नंदलाल
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krishna
भगवान राम के इस कथन के कारण श्री कृष्ण रूप में देवकी के गर्भ से जन्म लेकर भी कृष्ण यशोदा के लल्ला कहलाए।
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देवकी के गर्भ से जन्म लेने के बाद भी श्री कृष्ण इसलिए कहलाए यशोदा के नंदलाल
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कृष्ण
भगवान अपनी किसी माता को निराश नहीं करना चाहते थे इसलिए पहले इन्होंने मातृत्व सुख देवकी को प्रदान किया फिर यशोदा को आनंदित किया। पूर्व जन्म में देवी सुमित्रा के गर्भ से शेषनाग के अवतार लक्ष्मण ने जन्म लिया था और कृष्णावतार के समय शेषनाग जी ने बलराम के रूप में अवतार लिया
देवकी के गर्भ से जन्म लेने के बाद भी श्री कृष्ण इसलिए कहलाए यशोदा के नंदलाल
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कृष्ण बलराम
भगवान श्री कृष्ण की तरह बलराम जी ने भी देवकी के गर्भ में प्रवेश किया लेकिन मातृत्व सुख देवी रोहिणी को प्राप्त हुआ। माना जाता है कि देवी रोहिणी पूर्व जन्म में लक्ष्मण की माता सुमित्रा थी।