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मां मंगला गौरी की साधना से मिलेगी मंगल दोष से मुक्ति

Tue, 07 Aug 2018 11:48 AM IST
धर्म डेस्क,अमर उजाला
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सौभाग्य प्रदान कर जीवन को मंगलमय बनाने वाली भगवती मंगला गौरी का प्राचीन मंदिर बनारस के बालाजी घाट के ऊपर स्थित है। मंगला गौरी के इस पावन पीठ को काशी का उच्च शिखर माना जाता है। इस सिद्धपीठ की विशेषता है कि माता के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। मंगला गौरी हर उस व्यक्ति की इच्छा पूर्ण करती है, जो उनके दरबार में पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पहुंचता है।
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दर्शन से दूर होती है विवाह सबंधी बाधाएं
मान्यता है कि भगवती के इस प्राचीन एवं सिद्ध मंदिर में पूजा अर्चना करने से विवाह में विलंब या फिर किसी प्रकार की बाधा दूर हो जाती है। जिन कन्याओं के विवाह में देर होती हे या फिर तमाम कोशिशों के बावजूद उनका विवाह नहीं हो पाता, उनके लिए माता का दरबार एक वरदान के रूप में है। मां मगला गौरी सौभाग्य एवं मंगल की प्रधान देवी हैं और जो लड़की 7, 14, 21 मंगला गौरी के दर्शन करता है, उनका विवाह निश्चित तौर पर अतिशीघ्र हो जाता है।
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माता को चढ़ाई जाती है हल्दी की माला
 
विवाह में हो दिक्कतों को दूर करने के लिए मां मंगला गौरी की मूर्ति पर चालीस दिन तक सिंदूर चढ़ाने और मांगलिक दोष दूर करने के लिए माता को हल्दी की गांठ की माला चढ़ाने का विधान हैं। इसके लिए मांगलिक कन्या को माता के दरबार में 7 या 14 मंगल जाकर विधि-विधान से पूजा अर्चना करनी होती है।
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मंगल दोष से मिलती है मुक्ति

श्रावण मास के हर मंगलवार को स्त्रियां अखंड सौभाग्य की कामना से मां गौरी का व्रत रखती हैं। मांगलिक कन्याओं के लिए यह व्रत तो वरदान की तरह साबित होता है। ज्योतिषियों के अनुसार मंगला गौरी का व्रत करने से मांगलिक दोष समाप्त होता है और कन्या के विवाह के योग बनने लगते हैं।
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