मंगला गौरी व्रत में क्यों चढ़ाई जाती हैं 16 चीजें
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मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ अथवा नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां मंगला गौरी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। संकल्प मंत्र है, "मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये।" पूजा स्थान पर चौकी रखकर पहले सफेद और फिर लाल वस्त्र बिछाएं। उस पर माता मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं। परंपरा के अनुसार आटे का दीपक बनाकर उसमें 16 बत्तियां लगाने की परंपरा है। इसके बाद चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर षोडशोपचार पूजा करें।