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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति को खिचड़ी क्यों कहा जाता है? खिलजी और बाबा गोरखनाथ से जुड़ी है इसकी कहानी

Mon, 16 Dec 2024 07:46 AM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

नया साल आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और साल 2025 का पहला त्योहार मकर संक्रांति भी नजदीक है। यह त्योहार 14 जनवरी, 2025 को मनाया जाएगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस त्योहार को खिचड़ी क्यों कहा जाता है, आइए विस्तार से जानते हैं।
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मकर संक्रांति 2025 - फोटो : Amar Ujala
Why is Makar Sankranti Called Khichdi: नया साल आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और साल 2025 का पहला त्योहार मकर संक्रांति भी नजदीक है। यह त्योहार 14 जनवरी, 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। मगर क्या आप जानते हैं कि खिचड़ी बनाने के पीछे क्या कहानी है?

कहा जाता है कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन खिचड़ी दान करने का विशेष महत्व है, साथ ही घरों में खिचड़ी बनाई जाती है। अक्सर लोगों के दिमाग में सवाल आता है कि आखिर इस दिन खिचड़ी ही क्यों बनाई जाती है। बता दें कि इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है जिसके बारे में आपको जानना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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masala khichdi - फोटो : instagram
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का क्या है महत्व?
एक कहानी के अनुसार, मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा के पीछे एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। कहते हैं कि जब खिलजी ने भारत पर आक्रमण किया था, उस समय नाथ योगी युद्ध लड़ रहे थे। लगातार युद्ध के कारण उन्हें खाने का समय नहीं मिल पाता था और वे काफी कमजोर हो गए थे।
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masala khichdi - फोटो : instagram
उस समय गुरु गोरखनाथ ने सभी को दाल, चावल और सब्जियां मिलाकर एक साथ पकाने को कहा। इस तरह खिचड़ी बनी। यह भोजन जल्दी बन जाता था और खाने में भी आसान था। नाथ योगियों ने इस खिचड़ी को खाकर नई ऊर्जा प्राप्त की और युद्ध लड़ने लगे। तब से ही मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा चली आ रही है।

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Makar Sankranti - फोटो : adobe stock
बाबा गोरखनाथ की सलाह से नाथ योगियों ने दाल, चावल और सब्जी को मिलाकर एक नया पकवान बनाया। इस पकवान को उन्होंने खिचड़ी नाम दिया। यह भोजन जल्दी पक गया और युद्ध में थके हुए योगियों को ताकत मिली। खिलजी को हराने के बाद नाथ योगियों ने मकर संक्रांति के दिन उत्सव मनाया और इस नए पकवान, खिचड़ी को सबके साथ बांटा। तब से ही मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने और बांटने की परंपरा शुरू हो गई। यह परंपरा आज भी जारी है और खिचड़ी को एक पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन माना जाता है।
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Makar Sankranti - फोटो : adobe stock
क्यों लगाया जाता है दही-चूड़ा का भोग?
मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का विशेष महत्व है। इसे भगवान सूर्य को भोग लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि दही-चूड़ा खाने से रिश्ते मजबूत होते हैं और सौभाग्य मिलता है। खिचड़ी के साथ भी दही-चूड़ा चढ़ाया जाता है। हिंदू धर्म में दही-चूड़ा को शुभ माना जाता है। कई राज्यों में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा खाने की प्रथा है। यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि दही-चूड़ा स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। इसमें कई पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है
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