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Makar Sankranti 2022: लोहड़ी के अगले दिन मनाई जाएगी मकर सक्रांति, जाने पुण्यकाल और महापुण्य काल मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Wed, 12 Jan 2022 03:32 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
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Makar Sankranti 2022 - फोटो : self
Makar Sankranti 2022: पूरे भारत वर्ष में लोहड़ी के अगले दिन यानि 14 जनवरी को पूरे धूम धाम से मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में से एक है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जाता है और सभी शुभ और मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते है। पौष मास में जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं उस काल विशेष को ही संक्रांति कहते हैं। हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देव कहा गया है। जो प्रतिदिन साक्षात् दर्शन देकर सारे जगत में ऊर्जा का संचार करते हैं। भारतीय ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य अपनी नियमित गति से राशि परिवर्तन करता है। सूर्य के इसी राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। इस तरह साल में 12 संक्राति तिथियां पड़ती हैं। जिनमें से मकर संक्रांति सबसे महत्वपूर्ण है। मकर सक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इतना ही नहीं, इस दिन असम में बीहू और दक्षिण भारत में पोंगल का त्योहार होता है। वहीं, गुजरात और महाराष्ट्र में इस दिन उत्तरायण का त्योहार कहते हैं। पंजाब में एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है।  कहते हैं मकर संक्रांति के दिन से सर्दी का मौसम थोड़ा शांत हो जाता है। 
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Makar Sankranti 2022 - फोटो : अमर उजाला
मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त 
14 जनवरी 2022 पुण्य काल आरंभ:
दोपहर 02.43 से 
14 जनवरी 2022 पुण्य काल समाप्त: सायं 05.45 
पुण्य काल की कुल अवधि- 03 घंटे 02 मिनट 

मकर संक्रांति के दिन महा पुण्यकाल आरंभ:  14 जनवरी, 2022 दोपहर 02.43 से 
मकर संक्रांति के दिन महा पुण्यकाल समाप्त: 14 जनवरी, 2022 दोपहर 04:28 तक 
कुल अवधि - 01 घंटा 45 मिनट
 
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Makar Sankranti 2022 - फोटो : Social Media
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व 
मकर संक्रांति का धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस दिन को भारत के कई क्षेत्रों में उत्तरायण कहा जाता है। उत्तर भारत में माघ मेले का आयोजन होता है। मकर सक्रांति का मयत्व के कारण ही त्रिवेणी संगम और काशी में इस दिन गंगा स्नान की परंपरा है। मकर सक्रांति के दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र दान करने का रिवाज है। मकर सक्रांति के दिन खिचड़ी का दान किया जाता है और घरों में तिल और गुड़ के पकवान भी बनते हैं। 

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Makar Sankranti 2022
मकर संक्रांति का ऐतिहासिक महत्व 
अगर ऐतिहासिक महत्व की बात करें तो ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान भास्कर यानी कि सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने जाते हैं और चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही अपना देह त्याग किया था।  
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Makar Sankranti 2022 - फोटो : संजय लाेचन पांडेय, अमर उजाला कानपुर
सूर्यदेव की  करें आरधना 
  • इस दिन दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण, जप, तप का खासा महत्व है। 
  • मकर सक्रांति के दिन सूर्य देव को अर्घ्य दें। 
  • अर्घ्य देते समय कलश में थोड़ा सा तिल अवश्य डाल लें। 
  • मकर सक्रांति के दिन इस मंत्र से सूर्यदेव की आराधना करें। मंत्र इस प्रकार है- माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम। स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥
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