फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर सूर्यदेव होते हैं उत्तरायण, जानिए महत्व और किन- किन चीजों का करें दान

विज्ञापन
1 of 5
Makar Sankranti 2022: इस दिन तिल का सेवन और साथ ही दान करना शुभ होता है। - फोटो : अमर उजाला
Makar Sankranti 2022: सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना "संक्रान्ति" कहलाता है, इसी प्रकार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को "मकर संक्रान्ति" के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रान्ति के दिन देव भी धरती पर अवतरित होते हैं, आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है, अंधकार का नाश व प्रकाश का आगमन होता है। इस दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का अनन्य महत्त्व है। इस दिन गंगा स्नान व सूर्योपासना पश्चात गुड़, चावल और तिल का दान श्रेष्ठ माना गया है। मकर संक्रान्ति के दिन खाई जाने वाली वस्तुओं में जी भरकर तिलों का प्रयोग किया जाता है। तिल से बने व्यंजनों की खुशबू मकर संक्रान्ति के दिन हर घर से आती महसूस की जा सकती है। इस दिन तिल का सेवन और साथ ही दान करना शुभ होता है। तिल का उबटन, तिल के तेल का प्रयोग, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल मिश्रित जल का पान, तिल-हवन, तिल की वस्तुओं का सेवन व दान करना व्यक्ति के पापों में कमी करता है।
विज्ञापन

2 of 5
मकर संक्रांति 2022 - फोटो : अमर उजाला
मकर संक्रांति पर सूर्यदेव होते हैं उत्तरायण
मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कहा जाता है कि सूर्य के इस बदलाव से व्यक्ति की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इसके अलावा इस दिन से रात छोटी और दिन बड़ा होने लगता हे। यहां रात के छोटे होने से अंधकार कम होने और दिन के बड़े होने से प्रकाश में वृद्धि होने की बात कही गई है। यही वजह है कि सूर्य के इस परिवर्तन यानी कि मकर संक्रांति के दिन को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना भी कहते हैं। गीता के आठवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा भी सूर्य के उत्तरायण का महत्व स्पष्ट किया गया है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि 'हे भरतश्रेष्ठ! ऐसे लोग जिन्हें ब्रह्म का बोध हो गया हो, अग्निमय ज्योति देवता के प्रभाव से जब छह माह सूर्य उत्तरायण होता है, दिन के प्रकाश में अपना शरीर त्यागते हैं, पुन: जन्म नहीं लेना पड़ता है। जो योगी रात के अंधेरे में, कृष्ण पक्ष में, धूम्र देवता के प्रभाव से दक्षिणायन में अपने शरीर का त्याग करते हैं, वे चंद्रलोक में जाकर पुन: जन्म लेते हैं। 

वेदशास्त्रों के अनुसार, प्रकाश में अपना शरीर छोड़नेवाला व्यक्ति पुन: जन्म नहीं लेता, जबकि अंधकार में मृत्यु प्राप्त होने वाला व्यक्ति पुन: जन्म लेता है। यहां प्रकाश एवं अंधकार से तात्पर्य क्रमश: सूर्य की उत्तरायण एवं दक्षिणायन स्थिति से ही है। संभवत: सूर्य के उत्तरायण के इस महत्व के कारण ही पितामह भीष्म ने अपना प्राण तब तक नहीं छोड़ा, जब तक मकर संक्रांति अर्थात सूर्य की उत्तरायण स्थिति नहीं आ गई। सूर्य के उत्तरायण का महत्व छांदोग्य उपनिषद में भी किया गया है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि सूर्य की उत्तरायण स्थिति का बहुत ही अधिक महत्व है। सूर्य के उत्तरायण होने पर दिन बड़ा होने से मनुष्य की कार्य क्षमता में भी वृद्धि होती है जिससे मानव प्रगति की ओर अग्रसर होता है। प्रकाश में वृद्धि के कारण मनुष्य की शक्ति में भी वृद्धि होती है और सूर्य की यह उत्तरायण स्थिति चूँकि मकर संक्रांति से ही प्रारंभ होती है, यही कारण है कि मकर संक्रांति को पर्व के रूप में मनाने का प्रावधान हमारे भारतीय मनीषियों द्वारा किया गया और इसे प्रगति तथा ओजस्विता का पर्व माना गया जो कि सूर्योत्सव का द्योतक है।

देवताओं की दिशा में सूर्य के गमन के दिवस को शास्त्रों में दान-पुण्य के कार्यों और स्नान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग स्नान के साथ कई वस्तुएं दान करते हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किया गया दान आपको फल के रूप में सौ गुना वापस होकर प्राप्त होता है। इसलिए दान-पुण्य के इस शुभ अवसर को गंवाए बिना अपनी क्षमता के अनुरूप हम सभी को कुछ न कुछ दान जरूर करना चाहिए। 
विज्ञापन

3 of 5
गंगा में स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
आइए जानते हैं मकर संक्रांति के दिन किन चीजों को दान करना शुभ माना जाता है-

खिचड़ी का दान 
मकर संक्रांति को प्रमुख तौर पर खिचड़ी का पर्व माना जाता है और इस दिन खिचड़ी का दान करने का विशेष महत्व भी माना गया है। इस दिन चावल और उड़द की काली दाल का दान खिचड़ी के रूप में किया जाता है। उड़द का संबंध शनि देव से माना जाता है और इसका दान करने से शनि दोष दूर होते हैं। वहीं चावल को अक्षय अनाज माना जाता है। चावल को दान करने से आपको अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

तिल का दान 
मकर संक्रांति को शास्त्रों में तिल संक्रांति भी कहा गया है और इस दिन तिल के दान का खास महत्व माना गया है। मकर संक्रांति पर तिल के दान के साथ ही भगवान विष्णु, सूर्य और शनिदेव की तिल से पूजा की जाती है। इसके साथ ही तिल से बनी चीजों का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। दरअसल शनि देवता ने अपने क्रोधित पिता सूर्य देवता की पूजा करने के लिए काले तिल का ही प्रयोग किया था। इससे प्रसन्न होकर सूर्य देव ने वरदान दिया था कि जब भी वह मकर राशि में आएंगे तो तिल से उनकी पूजा करने और तिल का दान करने से वह प्रसन्न होंगे। इस दिन तिल का दान करने से शनि दोष भी दूर होता है।

4 of 5
पतंगबाजी - फोटो : पिक्साबे
ऊनी कपड़े का दान
मकर संक्रांति के अवसर पर ऊनी कपड़े का दान करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन किसी गरीब जरूरतमंद या फिर किसी आश्रम में ऊनी कपड़े, कंबल का दान जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से आप शनि और राहु के अशुभ प्रभाव से भी दूर रहते हैं।

गुड़ का दान 
ज्योतिष में गुड़ को गुरु की प्रिय वस्तु माना गया है। गुड़ का दान करने के साथ ही इस दिन कुछ मात्रा में गुड़ हम सभी को खाना भी चाहिए। ऐसा करने से शनि, गुरु और सूर्य तीनों के दोष दूर होते हैं। मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ के लड्डू या फिर गुड़ और मुरमुरे के लड्डू दान कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Happy Makar Sankranti - फोटो : Amar Ujala
देशी घी का दान 
ज्योतिष में घी को भी सूर्य और गुरु से जोड़कर देखा जाता है। मकर संक्रांति पर शुद्ध घी का दान करने से आपको करियर में लाभ के साथ सभी प्रकार की भौतिक सुविधाएं प्राप्त होती हैं और साथ मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

नमक का दान 
मकर संक्रांति के दिन नमक का दान भी विशेष माना जाता है। इसलिए नमक का दान अवश्य करें। यदि आप इस दिन नमक का दान करते हैं तो आपके सभी अनिष्टों का नाश होता है और आपका बुरा वक्त भी टल जाता है। इसलिए नमक का दान मकर संक्रांति के दिन शुभ माना जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें