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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग, जानें महत्व और अभिषेक के नियम

Sat, 14 Feb 2026 03:49 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

सार

Sarvartha Siddhi Yoga On Mahashivratri: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की वैवाहिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। शिवपुराण में बताया गया है कि जो लोग विवाहित हैं उन्हें अपने जीवनसाथी के साथ इस दिन पूरे विधि विधान से महाशिवरात्रि की पूजा करनी चाहिए।
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महाशिवरात्रि 2026 शुभ योग और जलाभिषेक की विधि - फोटो : Amar Ujala
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 15 फरवरी रविवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग एक साथ बने हैं। इसलिए इस साल यह त्योहार बहुत ही शुभ फल देने वाला माना जा रहा है। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल की महाशिवरात्रि सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे कई बेहद शुभ योग के बीच में मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की वैवाहिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। शिवपुराण में बताया गया है कि जो लोग विवाहित हैं उन्हें अपने जीवनसाथी के साथ इस दिन पूरे विधि विधान से महाशिवरात्रि की पूजा करनी चाहिए।

Mahashivratri: उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में महाशिवरात्रि, जानें शुभ योग और पूजा मुहूर्त
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महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग - फोटो : adobe stock
महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग
सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि जैसे महापर्व का होना शिवजी की विशेष कृपा देने वाला माना जा रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग 15 फरवरी को प्रातः काल 7 बजे से शाम 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि का व्रत करने और पूजा करने से आपको हर कार्य में मनचाही सफलता प्राप्त होगी और आपके काम बिना किसी बाधा के पूर्ण होंगे। आपके शिवजी की कृपा से सभी रुके कार्य पूर्ण होंगे और कारोबार में सफलता प्राप्त होगी। इसके अलावा खास बात यह है कि सर्वार्थ सिद्धि योग रविवार को होने से इसका शुभ प्रभाव और भी बढ़ जाता है। इस साल महाशिवरात्रि आपके भौतिक सुखों में वृद्धि करने वाली मानी जा रही है।
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महाशिवरात्रि में उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग  - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि में उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग 
महाशिवरात्रि को शाम 7 बजकर 47 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा।उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा करना सुख, समृद्धि और वैवाहिक सुख के लिए अत्यंत फलदायी है। महाशिवरात्रि के दिन 11 बेलपत्र और धतूरे के साथ शिवजी का जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह दिन कार्य में सफलता और सौभाग्य लाता है। यह नक्षत्र सूर्य की ऊर्जा (तेज, सफलता) और शिव की शक्ति का मिश्रण है, जो जीवन में स्थिरता, स्वास्थ्य और सुख प्रदान करता है।

श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ शाम 7 बजकर 48 मिनट पर होगा। श्रवण नक्षत्र अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह चंद्रमा से संबंधित है। महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरे से अभिषेक करना, “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करना और शिव-पार्वती की कथा सुनना विशेष पुण्यदायी होता है। यह पूजा मानसिक शांति और सुख-समृद्धि लाती है।

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निशिता काल में सिद्धि योग - फोटो : अमर उजाला
निशिता काल में सिद्धि योग
महाशिवरात्रि पर निशीथ काल की पूजा का समय  रात 11 बजकर 57 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा और इस काल में शिव साधना का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। इस समय में शिव पूजा के लिए किए जाने वाले सभी उपाय बहुत ही असरदार माने जाते हैं और भोले बाबा बहुत जल्द आपसे प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण करते हैं। आपके सुख में वृद्धि होती है और सभी कार्य सरलता से पूर्ण हो जाते हैं।
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महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार शिवलिंग का अभिषेक - फोटो : Amar Ujala
महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार शिवलिंग का अभिषेक और पूजा करके अपने मनोरथ पूर्ण करें

मेष:  गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर अभिषेक करें।
वृष: दही से अभिषेक। सफेद पुष्प, फल और वस्त्र चढ़ाएं।
मिथुन: गन्ने के रस से अभिषेक करें। धतूरा, पुष्प, भांग व हरा फल चढ़ाएं।
कर्क: दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक करें। सफेद वस्त्र, मिष्ठान्न व मदार का पुष्प चढ़ाएं।
सिंह: शहद या गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक करें। लाल पुष्प, वस्त्र और रोली अर्पित करें।
कन्या: गन्ने के रस से अभिषेक करें। भांग, धतूरा, मंदार का पत्र व पुष्प चढ़ाएं।
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महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार शिवलिंग का अभिषेक - फोटो : adobe stock
तुला: शहद से अभिषेक करें। भाग, मंदार पुष्प और सफेद वस्त्र चढ़ाएं।
वृश्चिक: शहद युक्त तीर्थ जल से अभिषेक करें। लाल पुष्प, फल और मिष्ठान चढ़ाएं।
धनु: गाय के दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करें। पीला वस्त्र, फल, भांग व धतूरा चढ़ाएं।
मकर: गंगाजल या गन्ने के रस से अभिषेक करें। शमी पत्र, भांग, धतूरा चढ़ाएं।
कुंभ: गन्ने के रस से अभिषेक करें। दूर्वा, शमी, मंदार पुष्प चढ़ाएं।
मीन: केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। केला और पीला पुष्प, फल व मिष्ठान चढ़ाएं।

वैदिक विभूषण ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

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