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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर शुभ योग, जानें चारों प्रहर का मुहूर्त, होगी भोलेनाथ की कृपा

Fri, 30 Jan 2026 12:09 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat:  महाशिवरात्रि 2026 पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। इस दिन बन रहे शुभ योग पूजा और व्रत को अत्यंत फलदायक बनाएंगे। देशभर के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, रुद्राभिषेक, भजन और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाएगा, जिससे भक्तों को भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
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महाशिवरात्रि 2026 - फोटो : amar ujala
Mahashivratri 2026 Date: हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन त्यौहार मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक माना जाता है और हिन्दू धर्म में अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर, शिवलिंग का अभिषेक और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे मनोकामनाएं  पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
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इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो पूजा और व्रत को और अधिक फलदायक बनाते हैं। इस अवसर पर देशभर में मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, भजन और आरती का आयोजन किया जाता है, और भक्त रातभर जागरण करके भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
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महाशिवरात्रि 2026 पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है। - फोटो : adobe stock
महाशिवरात्रि के दिन बनेंगे ये शुभ योग
पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि 2026 पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इस दिन की पूजा और व्रत को और अधिक फलदायक बनाते हैं। सबसे प्रमुख योग है सर्वार्थ सिद्धि योग, जिसे अति शुभ और दुर्लभ माना जाता है। इस योग में की गई पूजा, जप और व्रत सभी प्रकार की बाधाओं को दूर कर सफलता प्रदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव, मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

इसके साथ ही इस दिन अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। वहीं, 15 फरवरी को शिववास योग भी बन रहा है, जिसमें विशेष रूप से रुद्राभिषेक और शिवलिंग की विधिपूर्वक पूजा करने का अत्यधिक महत्व है। महाशिवरात्रि की शाम में श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग भी बन रहा है। पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी, रविवार को रात 7 बजकर 48 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा। यह समय भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दौरान की गई पूजा से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।
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महाशिवरात्रि चारों प्रहर का मुहूर्त - फोटो : adobe stock
महाशिवरात्रि चारों प्रहर का मुहूर्त
महाशिवरात्रि 2026 फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी। इस वर्ष यह तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। इस पावन रात्रि में भगवान शिव की आराधना के लिए दिनभर विशेष पूजा और समय निर्धारित हैं। 
  • निशिता काल पूजा: 16 फरवरी,  रात्रि 12:09 बजे से रात्रि 01:01 बजे तक। 
  • प्रथम प्रहर पूजा:15 फरवरी,  सायं 06:11 बजे से रात्रि 09:23 बजे तक। 
  • द्वितीय प्रहर पूजा:15 फरवरी, रात्रि 09:23 बजे से 16 फरवरी, रात्रि 12:35 बजे तक। 
  • तृतीय प्रहर पूजा:16 फरवरी, रात्रि  12:35 बजे से तड़के 03:47 बजे तक। 
  • चतुर्थ प्रहर पूजा:16 फरवरी, तड़के 03:47 बजे से प्रातः 06:59 बजे तक। 
 

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महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। - फोटो : adobe stock
महाशिवरात्रि 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 15 फरवरी, रविवार को रात में 7 बजकर 49 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा। इस समय में की गई पूजा अत्यंत फलदायक मानी जाती है।

इसके अलावा इस वर्ष महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए दुर्लभ और अत्यंत शुभ योग है। सर्वार्थ सिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र का संयोग होने के कारण इस दिन की पूजा और अधिक फलदायक मानी जाती है। इस समय की गई विधिपूर्वक पूजा, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप से भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का प्रवाह बढ़ता है।
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महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव पहली बार प्रकट हुए थे। - फोटो : adobe stock
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
महाशिवरात्रि केवल भगवान शिव का महापर्व ही नहीं है, बल्कि इस दिन का धार्मिक महत्व अत्यंत गहन है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां पार्वती और भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा और उनका अभिषेक करने से भक्तों को विशेष फल प्राप्त होते हैं। इस दिन की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है और दांपत्य जीवन मधुर बना रहता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव पहली बार प्रकट हुए थे। वे उस समय एक विशाल अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में प्रकट हुए, जिसका न कोई आदि था और न कोई अंत। यही कारण है कि इस दिन शिवलिंग की पूजा, रात्रि जागरण और व्रत करने का विशेष महत्व माना गया है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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