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Shukra Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत आज, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव की आराधना

Fri, 30 Jan 2026 12:08 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Shukra Pradosh Vrat 2026: आज 30 जनवरी, शुक्रवार को अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा, जिसे विशेष रूप से शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे करने से जीवन में सुख, समृद्धि और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। त्रयोदशी तिथि और शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण आज का व्रत और भी फलदायी रहेगा।
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शुक्र प्रदोष व्रत - फोटो : अमर उजाला
Pradosh Vrat January 2026 Date: आज, 30 जनवरी, शुक्रवार को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाने वाला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए किया जाता है और इसे रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और आंतरिक शांति आती है। शुक्रवार होने के कारण इसे विशेष रूप से शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है, जो अपने आप में अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। 
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज का यह व्रत रखने से न केवल धन-संपत्ति से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आते हैं। इस अवसर पर उचित विधि से पूजा-अर्चना और उपवास करने से भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। आज हम आपको बताएंगे कि शुक्र प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में।
 
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प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला
प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समय इस प्रकार है।
त्रयोदशी तिथि आरंभ: 30 जनवरी 2026, सुबह 11:09 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 जनवरी 2026, सुबह 08:25 बजे
चूंकि प्रदोष व्रत में प्रदोष काल के दौरान भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए यह व्रत 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को ही रखा जाएगा।
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पूजा का शुभ समय - फोटो : adobe stock
पूजा का शुभ समय
शिव पूजन के लिए शाम 05:59 बजे से रात 08:37 बजे तक का समय श्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान भक्तों को लगभग ढाई घंटे तक भगवान शिव की आराधना का अवसर मिलेगा।

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पड़ने वाले प्रदोष व्रत अलग-अलग फल प्रदान करते हैं। शुक्र प्रदोष व्रत विशेष रूप से धन, वैवाहिक सुख और सौभाग्य की वृद्धि के लिए किया जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद मुद्रा में रहते हैं और इस समय की गई पूजा से वे शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
यदि आप आर्थिक समस्याओं से परेशान हैं या जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं, तो इस विधि से पूजा करें। 
  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, संभव हो तो सफेद रंग के कपड़े पहनें। 
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। प्रदोष काल में पुनः स्नान करें या हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं। 
  • इसके बाद शिव मंदिर में या घर पर शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें।
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प्रदोष व्रत की पूजा विधि - फोटो : adobe stock
  • भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और मिठाई अर्पित करें। 
  • पूजा के समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और शुक्र प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें। अंत में शिव जी की आरती करें। 
  • इस दिन शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाकर खीर का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। 
  • इससे शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और घर में सुख-सुविधाओं का विस्तार होता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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