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Mahashivratri 2025: महादेव की कृपा पाने के लिए महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप, मिलेंगे मनचाहे परिणाम

Wed, 26 Feb 2025 05:35 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mahashivratri 2025: आज यानी 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है, जो फागुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। 
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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
Mahashivratri 2025: आज यानी 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है, जो फागुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था, जिसके उपलक्ष्य में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन शिव संग पार्वती की उपासना करने से साधक के प्रेम जीवन में मधुरता का वास और रिश्तों में मजबूती आती हैं।

शास्त्रों की मानें को भगवान शिव आसानी से प्रसन्न होने वाले देवता है। वह केवल एक लोटा जल से ही अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। ऐसे में उनकी पूजा में कुछ खास मंत्रों का जाप करना और भी कल्याणकारी हो सकता है। बता दें, भोलेनाथ योग, ध्यान, प्रेम, करुणा और शक्ति के प्रतीक है। उनकी पूजा और मंत्र से व्यक्ति के बड़े से बड़े संकटों का निवारण होता है। ऐसे में आप महाशिवरात्रि के दिन महादेव के इन खास मंत्रों का जाप कर सकते हैं, जिससे कई तरह के लाभ की प्राप्ति संभव है। आइए इसके बारे में जानते हैं..
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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!

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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा ।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥
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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
शिव जी का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।
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Shiv Ji Ki Aarti - फोटो : Amar Ujala

भगवान शिव की आरती

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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