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Maha Shivratri 2025: महाशिवरात्रि पर क्यों की जाती है गणेश पूजा? जानें इसकी विधि और लाभ

Wed, 12 Feb 2025 12:10 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ganesh Worship on Maha Shivratri: महाशिवरात्रि भगवान शिव की पूजा का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन शिव पार्वती की आराधना के साथ भगवान गणेश की पूजा भी अत्यंत फलदायी होती है। शास्त्रों के अनुसार, शिवरात्रि को 'चैतन्य रात्रि' कहा जाता है। कहते हैं इसमें भगवान गणेश की आराधना करने से त्वरित फल प्राप्त होता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।
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महाशिवरात्रि 2025 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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How to Perform Ganesh Puja on Shivratri: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की पूजा का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना भी विशेष फलदायी होती है। शिवरात्रि को 'चैतन्य रात्रि' कहा जाता है, जिसमें गणेश जी की किसी भी रूप में पूजा करने से त्वरित फल मिलता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस वर्ष, महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025, बुधवार को आएगी। इस दिन रात में गणेश पूजन का विशेष महत्व है।

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शास्त्रों में भगवान गणेश की अनादि काल से आराधना का उल्लेख मिलता है। शिव-पार्वती के विवाह में गणेश जी की पूजा करने के संबंध में शिवपुराण, ब्रम्हवैवर्त पुराण, लिंग पुराण, स्कंद पुराण, पद्म पुराण, गणेश पुराण, मुद्रल पुराण इत्यादि ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है।  भगवान शिव के पुत्र गणेश गणपति के अवतार हैं। इसका उल्लेख पुराणों में गणेश न होकर गणपति या ब्रम्हणस्पति है। इसलिए गणपति अनादि हैं और शिव-पार्वती के विवाह के समय ब्रम्हवेला में मुनियों के निर्देश पर शिव-पार्वती ने गणपति की पूजा की। इसी कारण महाशिवरात्रि पर गणेश जी की आराधना करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है।

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mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
पूजन का सही समय और विधि
भगवान गणेश का एक स्वरूप उच्छिष्ट महागणपति के रूप में जाना जाता है, जिसे दिन और रात दोनों का देवता माना जाता है। इस रूप में वे शक्ति के साथ विराजमान होते हैं, इसलिए प्रदोष काल या रात्रि के समय गणपति पूजन विशेष फलदायी होता है।
1. सबसे पहले गुड़ से उच्छिष्ट महागणपति का स्वरूप बनाएं। यदि यह करना कठिन हो, तो गुड़ की एक बड़ी ढेली रखकर उसे उच्छिष्ट महागणपति मान सकते हैं।
2. इसके साथ एक और ढेली रखें, जिसे भगवती नील सरस्वती के रूप में स्थापित करें।
3. दूध, दही और शक्कर से दोनों का पंचोपचार करें।
4. दुर्वा का रस बनाकर भगवान का अभिषेक करें।
5. फिर ‘ॐ गण गणपते नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए लाजा चढ़ाएं और मोदक का भोग अर्पित करें, क्योंकि यह भगवान को अत्यंत प्रिय है।
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mahashivratri 2025 - फोटो : instagram
महाशिवरात्रि के अवसर पर गणेश पूजन का महत्व
महाशिवरात्रि पर गणेश पूजन करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और साधक को शिव की कृपा मिलती है। यह पूजा विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए लाभकारी मानी जाती है, जो अपने जीवन में किसी भी प्रकार की सफलता हासिल करना चाहते हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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