पूजन का सही समय और विधि
भगवान गणेश का एक स्वरूप उच्छिष्ट महागणपति के रूप में जाना जाता है, जिसे दिन और रात दोनों का देवता माना जाता है। इस रूप में वे शक्ति के साथ विराजमान होते हैं, इसलिए प्रदोष काल या रात्रि के समय गणपति पूजन विशेष फलदायी होता है।
1. सबसे पहले गुड़ से उच्छिष्ट महागणपति का स्वरूप बनाएं। यदि यह करना कठिन हो, तो गुड़ की एक बड़ी ढेली रखकर उसे उच्छिष्ट महागणपति मान सकते हैं।
2. इसके साथ एक और ढेली रखें, जिसे भगवती नील सरस्वती के रूप में स्थापित करें।
3. दूध, दही और शक्कर से दोनों का पंचोपचार करें।
4. दुर्वा का रस बनाकर भगवान का अभिषेक करें।
5. फिर ‘ॐ गण गणपते नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए लाजा चढ़ाएं और मोदक का भोग अर्पित करें, क्योंकि यह भगवान को अत्यंत प्रिय है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर गणेश पूजन का महत्व
महाशिवरात्रि पर गणेश पूजन करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और साधक को शिव की कृपा मिलती है। यह पूजा विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए लाभकारी मानी जाती है, जो अपने जीवन में किसी भी प्रकार की सफलता हासिल करना चाहते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।