Shivling Jalabhishek: यूं तो रोजाना घरों में भोलेनाथ की पूजा की जाती है। लेकिन महाशिवरात्रि की उपासना का विशेष महत्व है। यह अवसर महादेव को प्रसन्न और उनकी कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि यदि सच्चे भाव से महाशिवरात्रि पर महाकाल की आराधना की जाए, तो साधक के मन से सभी तरह के डर भय समाप्त होते हैं।
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो यह भोलेनाथ और मां पार्वती के मिलन का दिन और उनकी 'वैवाहिक वर्षगांठ' के रूप में ही महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। इस दिन घर, मंदिरों, पूजा पंडालों से लेकर सभी धार्मिक स्थलों पर महादेव की बारात निकाली जाती है। इस दौरान हरिद्वार और उज्जैन में इसकी विशेष रौनक देखने को मिलती हैं। यहां जगह-जगह शिव-पार्वती की पूजा और झांकियां देखने को मिलती हैं।
पंचांग के मुताबिक साल 2025 में 26 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस तिथि पर शिवलिंग का अभिषेक करने से साधक की समस्याएं समाप्त होती हैं, और करियर, नौकरी व व्यापार में भी तरक्की मिलती है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र और परिध योग बन रहा है, जो शिवलिंग जलाभिषेक के लिए बेहद लाभकारी है। लेकिन महाशिवरात्रि पर शिवलिंग जलाभिषेक हमेशा संपूर्ण विधि से करना चाहिए, अन्यथा कोई भूल हो सकती है। ऐसे में आइए जलाभिषेक की संपूर्ण विधि के बारे में जानते हैं।