फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shivling Jalabhishek: आने वाली है महाशिवरात्रि, यहां जानें शिवलिंग जलाभिषेक की संपूर्ण विधि

Fri, 14 Feb 2025 06:23 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यूं तो रोजाना घरों में भोलेनाथ की पूजा की जाती है। लेकिन महाशिवरात्रि की उपासना का विशेष महत्व है। यह अवसर महादेव को प्रसन्न और उनकी कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
विज्ञापन
1 of 4
पंचांग के मुताबिक साल 2025 में 26 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस तिथि पर शिवलिंग का अभिषेक करने से साधक की समस्याएं समाप्त होती हैं - फोटो : अमर उजाला
Shivling Jalabhishek: यूं तो रोजाना घरों में भोलेनाथ की पूजा की जाती है। लेकिन महाशिवरात्रि की उपासना का विशेष महत्व है। यह अवसर महादेव को प्रसन्न और उनकी कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि यदि सच्चे भाव से महाशिवरात्रि पर महाकाल की आराधना की जाए, तो साधक के मन से सभी तरह के डर भय समाप्त होते हैं।

धार्मिक ग्रंथों की मानें तो यह भोलेनाथ और मां पार्वती के मिलन का दिन और उनकी 'वैवाहिक वर्षगांठ' के रूप में ही महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। इस दिन घर, मंदिरों, पूजा पंडालों से लेकर सभी धार्मिक स्थलों पर महादेव की बारात निकाली जाती है। इस दौरान हरिद्वार और उज्जैन में इसकी विशेष रौनक देखने को मिलती हैं। यहां जगह-जगह शिव-पार्वती की पूजा और झांकियां देखने को मिलती हैं।

पंचांग के मुताबिक साल 2025 में 26 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस तिथि पर शिवलिंग का अभिषेक करने से साधक की समस्याएं समाप्त होती हैं, और करियर, नौकरी व व्यापार में भी तरक्की मिलती है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र और परिध योग बन रहा है, जो शिवलिंग जलाभिषेक के लिए बेहद लाभकारी है। लेकिन  महाशिवरात्रि पर शिवलिंग जलाभिषेक हमेशा संपूर्ण विधि से करना चाहिए, अन्यथा कोई भूल हो सकती है। ऐसे में आइए जलाभिषेक की संपूर्ण विधि के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 4
ब्रह्म मुहूर्त- 26 फरवरी को प्रात: काल में 05:17 से लेकर 06:05 मिनट तक - फोटो : freepik
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त- 26 फरवरी को प्रात: काल में 05:17 से लेकर 06:05 मिनट तक
  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:29 से रात 09 बजकर 34 मिनट तक
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - रात 09:34 से 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 39 मिनट तक
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को रात 12:39 से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को सुबह 03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक

 

विज्ञापन

3 of 4
महाशिवरात्रि के दिन सुबह ही स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण करें। - फोटो : freepik
जलाभिषेक की विधि
  • महाशिवरात्रि के दिन सुबह ही स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • अब पूजा की सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें।
  • अब शिवलिंग का दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गन्ने के रस से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय ध्यान रखें है कि जल की धारा पतली और धीमी गति के साथ गिरे।
  • भूलकर भी तेजी से जलाभिषेक न करें।
  • फिर गंगाजल में काला तिल मिलाकर 108 बार महादेव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • अब इस जल को शिवलिंग पर अर्पित कर दें।
  • इसके बाद भोलेनाथ को फल और फूल अर्पित करें।
  • महादेव के समक्ष आटे का चौमुखी दीपक जला लें।
  • अब धूपबत्ती भी जला लें।
  • शिव चालीसा का पाठ करें।
  • आरती करें और पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे।
विज्ञापन

4 of 4
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र - फोटो : freepik
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र

मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।

तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥

श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।

शिव शक्तिशाली मंत्र

ऐं ह्रीं श्रीं 'ऊँ नम: शिवाय:' श्रीं ह्रीं ऐं।

ऊँ हौं जूं स:


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें