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Mahashivratri 2022: भगवान शिव को कैसे मिला था त्रिशूल? जानिए क्या है त्रिशूल का महत्व

Wed, 23 Feb 2022 09:05 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महाशिवरात्रि 2022: भगवान भोलेनाथ का प्रमुख अस्त्र त्रिशूल है। - फोटो : istock
Mahashivratri 2022: भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए महाशिवरात्रि बहुत ही विशेष पर्व है। महादेव के भक्त पूरे वर्ष महाशिवरात्रि का इंतजार करते हैं। इस बार यह पर्व 1 मार्च 2022 को  मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस खास दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। साथ ही यह भी कहा जाता है की भगवान शंकर ने इसी दिन साकार रूप लिया था। भगवान भोलेनाथ औघड़ दानी भी कहे जाते हैं। भगवान भोलेनाथ का ध्यान करते ही जटाधारीम सर्प और डमरू धरण करने वाले और त्रिशूलधारी शिव की छवि नजर आती है। भगवान भोलेनाथ का प्रमुख अस्त्र त्रिशूल है। हालांकि वो संहारक हैं और उन्हें किसी भी अस्त्र की आवश्यक नहीं है परंतु नीलकंठ महादेव के सभी वस्तुएं किसी न किसी का प्रतीकात्मक स्वरूप मानी जाती है। भगवान शिव के पास त्रिशूल कैसे आया, त्रिशूल किसका प्रतीक है और क्या है इसका महत्व, आइए जानते हैं विस्तार से- 
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महाशिवरात्रि 2022: भगवान शिव का त्रिशूल पवित्रता एवं शुभकर्म का प्रतीक है। - फोटो : istock
भगवान शिव के त्रिशूल का महत्व 
भगवान शिव का त्रिशूल पवित्रता एवं शुभकर्म का प्रतीक है। प्रायः समस्त शिवालयों में त्रिशूल स्थापित किया जाता है। कई शिवालयों में सोने चांदी और लोहे की धातु से बने त्रिशूल  दिखाई देते हैं। भगवान शिव का त्रिशूल में जीवन के कई रहस्य है। हिंदू मान्यता के अनुसार कई देवी-देवता त्रिशूल धारण करते हैं मान्यता है कि जब भगवान भोलेनाथ ब्रह्मनाद से प्रकट हुए तभी सृष्टि में तीन गुण उत्पन्न हुए और शिव जी शूल बनें और इससे ही त्रिशूल का निर्माण हुआ।  विष्णु पुराण में  उल्लिखित है कि विश्वमकर्मा ने सूर्य के अंश से त्रिशूल का निर्माण किया था, जिसको उन्होंने भगवान शिव को अर्पित किया था। 
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महाशिवरात्रि 2022: भगवान शिव का त्रिशूल तीन गुणों का प्रतीक है। - फोटो : istock
तीन गुणों का प्रतीक
भगवान शिव जब प्रकट हुए थे तब उनके साथ रज, तम और सत गुण भी प्रकट हुए थे और इन्हीं तीन गुणों से मिलकर भगवान भोलेनाथ शूल बनें और इसी से त्रिशूल बना। 

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महाशिवरात्रि 2022: त्रिशूल को तीन काल से भी जोड़कर देखा जाता है। - फोटो : istock
तीन काल का प्रतीक
महादेव के त्रिशूल को तीन काल भूतकाल, भविष्य काल और वर्तमान काल से भी जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण से महादेव को भक्त  त्रिकालदर्शी भी कहते  हैं। 
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महाशिवरात्रि 2022: भगवान महादेव का कष्टों के विनाश का भी सूचक है।  त्रिशूल   - फोटो : istock
3 प्रकार के कष्टों के विनाश के सूचक
भगवान महादेव का त्रिशूल  दैनिक, दैविक और भौतिक इन 3 प्रकार के कष्टों के विनाश का भी सूचक है। 
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महाशिवरात्रि 2022: महादेव का त्रिशूल उत्पत्ति, निर्माण और विनाश का प्रतीक है। - फोटो : istock
उत्पत्ति, निर्माण और विनाश का प्रतीक 
भगवान शिव का त्रिशूल के 3 शूल सृष्टि के उदय, संरक्षण और संहार करने का भी सूचक  है। 
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महाशिवरात्रि 2022: भगवान भोलेनाथ का त्रिशूल शैव सिद्धांत का प्रतिनिधित्व भी करता है। - फोटो : istock
शैव सिद्धांत के प्रतिनिधि
शैव मतानुसार भगवान शिव का त्रिशूल शैव सिद्धांत के पशुपति, पशु एवं पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। 
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महाशिवरात्रि 2022: तीन नाड़ियों का प्रतीक है भगवान शिव का त्रिशूल - फोटो : istock
तीन नाड़ियों का प्रतीक
भगवान भोलेनाथ का त्रिशूल वाम भाग में स्थिर इड़ा, दक्षिण भाग में पिंगला और मध्य भाग में सुषुम्ना नाड़ी का भी प्रतीक है। 
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