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Mahashivratri 2021: इन सात चीजों से कभी भी न करें शिवलिंग की पूजा, जानिए क्यों ?

Wed, 10 Mar 2021 07:56 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महाशिवरात्रि 2021: महाशिवरात्रि का पावन पर्व 11 मार्च, गुरुवार को है। - फोटो : अमर उजाला
Mahashivratri 2021: महापर्व महाशिवरात्रि गुरुवार,11 मार्च को है। महाशिवरात्रि हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है। भगवान शिव की साधना के लिए महाशिवरात्रि को सबसे बड़ा दिन माना गया है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। इसके लिए शिवलिंग पर कई चीजें अर्पित करते हैं, लेकिन कई बार भूलवश ऐसी चीजें भी चढ़ाने लगते हैं, जिसे शास्त्रों में वर्जित माना जाता है।
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shivling
शिवलिंग पर न चढ़ाएं तुलसीद
तुलसी को हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है और सभी शुभ कार्यों में इसका प्रयोग होता है, लेकिन तुलसी को भगवान शिव पर चढ़ाना मना है। भूलवश लोग भोलेनाथ की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करते हैं जिस वजह से उनकी पूजा पूर्ण नहीं होती।
 
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शिवलिंग
शिवलिंग पर तिल न करें अर्पित
तिल को शिवलिंग में चढ़ाना वर्जित माना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाना चाहिए।
 

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भगवान शिव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नही चढ़ता।

 
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शिवलिंग
कुमकुम या सिंदूर है वर्जित
कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक होता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए। साथ ही शिवलिंग पर हल्दी भी न चढ़ाएं।
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नारियल का इस्तेमाल न करें
कभी भी शिवलिंग पर नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। नारियल देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जिनका संबंध भगवान विष्णु से है इसलिए शिव जी को नहीं चढ़ता।
 
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न करें शंख का इस्तेमाल
शिव उपासना में शंख का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है। दरअसल भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का भक्त था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शिवजी की पूजा में कभी भी शंख नहीं बजाना चाहिए। 
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केतकी का फूल
शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल को अर्पित करना वर्जित माना जाता है।
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