आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी का व्रत किया जाता है। इस बार ये व्रत 13 सितंबर यानि बुधवार को है। 16 दिनों तक चलने वाला यह महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद के शुक्लपक्ष की अष्टमी को प्रारम्भ होता है और आश्विन मास कृष्णपक्ष की अष्टमी की तिथि तक चलता है। इस व्रत को करने से मां लक्ष्मी सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है।
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महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी के हाथी पर बैठी हुई मूर्ति को लाल कपड़ा के साथ विधि-विधान के साथ इनकी स्थापना करें और पूजा कर ध्यान लगाएं।
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महालक्ष्मी व्रत के दिन श्रीयंत्र या महालक्ष्मी यंत्र को मां लक्ष्मी के सामने स्थापित करें और इसकी पूजा करें। यह चमत्कारी यंत्र धन वृद्धि के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इस यंत्र की पूजा से परेशानियां और दरिद्रता दूर होती है।
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महालक्ष्मी व्रत में दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल और दूध डालकर देवी लक्ष्मी की मूर्ति से अभिषेक करना चाहिए इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
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माता लक्ष्मी को कमल का फूल बहुत पसंद होता है इसलिए लक्ष्मीजी की पूजा में यह फूल अवश्य चढ़ाना चाहिए।
महालक्ष्मी व्रत पर कमल गट्टे को माला को माता लक्ष्मी को चढ़ाए साथ ही पूजा में कौड़ी अर्पित करें। पूजा के बाद इन दोनों चीजों को अपने तिजोरी या लॉकर में रखें।