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Pradosh Vrat 2025: किस दिन रखा जाएगा माघ माह का प्रदोष व्रत? जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

Tue, 21 Jan 2025 08:06 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यानी प्रत्येक महीने में दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं। माघ माह में यह व्रत 27 जनवरी और 09 फरवरी को रखा जाएगा। आइए जानते हैं माघ माह में पड़ने वाले पहले प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि...
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Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
Magh Pradosh Vrat 2025: सनातन धर्म में माघ माह का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक पंचांग के अनुसार, माघ माह की शुरुआत मकर संक्रांति से होती है। इस वर्ष माघ माह की शुरुआत 14 जनवरी से हो चुकी है और 12 फरवरी को इसका समापन होगा। इस दौरान कई पावन पर्व मनाए जाएंगे, जिनमें प्रदोष व्रत का भी विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से शिव और पार्वती की पूजा करने से भय दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। 

माघ माह में प्रदोष व्रत की तिथियां
प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यानी प्रत्येक महीने में दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं। माघ माह में यह व्रत 27 जनवरी और 09 फरवरी को रखा जाएगा। आइए जानते हैं माघ माह में पड़ने वाले पहले प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि...

Pradosh Vrat 2025: साल 2025 के प्रदोष व्रत, जानें जनवरी से दिसंबर तक की तिथियां
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प्रदोष व्रत 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला
प्रदोष व्रत 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
27 जनवरी 2025 (कृष्ण पक्ष)

त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: 26 जनवरी, रात 08:54 बजे
त्रयोदशी तिथि का समापन: 27 जनवरी, रात 08:34 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:56 से रात 08:34 बजे तक

09 फरवरी 2025 (शुक्ल पक्ष)
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: 09 फरवरी, रात 07:25 बजे
त्रयोदशी तिथि का समापन: 10 फरवरी, शाम 06:57 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: रात 07:25 से रात 08:42 बजे तक
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प्रदोष व्रत विधि - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत विधि
प्रदोष व्रत के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान आदि से शुद्ध होकर भगवान शिव की पूजा करें। पूजा स्थल को गंगाजल से साफ कर पहले उसे पवित्र करें। इसके बाद वहा एक मंडप तैयार करें और रंग-बिरंगी रंगोली बनाकर दीप जलाएं। कुश के आसन पर पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा के लिए बैठें।

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प्रदोष व्रत विधि - फोटो : freepik
भगवान शिव का पार्थिव स्वरूप बनाकर रुद्राभिषेक या जलाभिषेक करें। व्रत के दौरान फलाहार करें। यदि संभव हो, तो मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और बेलपत्र अर्पित करें। शाम के समय पुनः स्नान कर भगवान शिव की पूजा करें। प्रदोष व्रत की कथा सुनें और पूजा के अंत में आरती करके भगवान को भोग अर्पित करें।
 
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प्रदोष व्रत का महत्व - फोटो : अमर उजाला
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत के दौरान भक्तजन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा पूरी श्रद्धा से करते हैं। इस व्रत को रखने से साधक को मानसिक शांति, समृद्धि, और पारिवारिक सुख प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत के धार्मिक महत्व और लाभों के कारण यह व्रत शिवभक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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