Mystery Behind Lord Jagannath Murti
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भगवान जगन्नाथ की बड़ी आँखों का रहस्य
भगवान जगन्नाथ की बड़ी-बड़ी आँखों के पीछे एक बेहद भावुक कथा जुड़ी है। जब भगवान श्रीकृष्ण द्वारका में निवास कर रहे थे, तब एक दिन रोहिणी माता वहाँ के लोगों को वृंदावन की रासलीलाओं की कथा सुना रही थीं। श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा जी दरवाजे के बाहर खड़े होकर वह कथा चुपचाप सुन रहे थे। कथा इतनी भावपूर्ण थी कि तीनों भाई-बहन प्रेम और विस्मय से भर उठे, और उनकी आँखें आश्चर्य से फैल गईं। उसी समय नारद मुनि वहाँ आए और उन्हें इस रूप में देखकर अत्यंत भावुक हो गए। उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिव्य रूप सदा भक्तों को भी देखने को मिले।
नारद मुनि की उस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए भगवान ने यह रूप स्थायी बना लिया। तभी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ उसी रूप में बनाई जाती हैं, बड़ी गोल आँखों और सरल, बिना विस्तार वाले शरीर के साथ। यह रूप न केवल एक कथा का प्रतिबिंब है, बल्कि भक्तों के प्रेम और भगवान की भावनात्मक संवेदनशीलता का प्रतीक भी बन गया है।