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Lord Jagannath Idol Mystery: जगन्नाथ जी की मूर्ति में हाथ-पैर क्यों नहीं होते? जानें उनकी अधूरी आकृति का रहस्य

Fri, 27 Jun 2025 10:18 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jagannath Bhagwan Ki Murti: भगवान जगन्नाथ, जिन्हें भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है, उनकी मूर्ति को जब पहली बार कोई देखता है तो वह आश्चर्यचकित रह जाता है। उनकी बड़ी-बड़ी गोल आँखें, जिनमें पलकें तक नहीं हैं, और एक ऐसा शरीर जिसमें हाथ-पैर नहीं दिखाई देते, यह कोई साधारण मूर्ति नहीं है।

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Mystery Behind Lord Jagannath Murti  - फोटो : adobe stock
Mystery Behind Lord Jagannath Murti:  हिन्दू धर्म में भगवान का स्वरूप केवल एक कलात्मक मूर्ति नहीं होता, बल्कि उनके दिव्य गुणों, लीलाओं और संदेशों का प्रतीक होता है। हर देवता की छवि में कोई न कोई विशेषता होती है, जो उनके चरित्र, शक्ति और उद्देश्य को दर्शाती है। इन्हीं विशेषताओं के माध्यम से साधक या भक्त भगवान के निकट पहुँचता है। इसी परंपरा में एक अत्यंत रहस्यमय और अद्भुत स्वरूप है भगवान जगन्नाथ का। भगवान जगन्नाथ, जिन्हें भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है, उनकी मूर्ति को जब पहली बार कोई देखता है तो वह आश्चर्यचकित रह जाता है। उनकी बड़ी-बड़ी गोल आँखें, जिनमें पलकें तक नहीं हैं, और एक ऐसा शरीर जिसमें हाथ-पैर नहीं दिखाई देते, यह कोई साधारण मूर्ति नहीं है। यह स्वरूप न केवल दृश्य रूप से अलग है, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक अर्थ छिपा हुआ है।
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कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि  भगवान की मूर्ति अधूरी क्यों है? उनकी आँखें इतनी बड़ी क्यों हैं? क्या कोई कथा है इसके पीछे? या फिर यह केवल कल्पना है? दरअसल, भगवान जगन्नाथ का यह रूप एक गहरी शिक्षाप्रद कथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें भक्ति, विश्वास और भगवान की लीला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह मूर्ति प्रतीक है उस सच्चाई का कि ईश्वर पूर्णता से नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास से प्राप्त होते हैं। और उनका यह स्वरूप हमें यह भी सिखाता है कि भगवान हर रूप में स्वीकार्य हैं  चाहे वह पारंपरिक हो या अद्भुत। तो आइए, अब विस्तार से जानें कि भगवान जगन्नाथ की बड़ी आँखों और उनके अधूरे स्वरूप के पीछे क्या रहस्य है, और कैसे यह रूप आज भी करोड़ों भक्तों के हृदय में आस्था और प्रेम का प्रतीक बना हुआ है। 
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Mystery Behind Lord Jagannath Murti  - फोटो : adobe stock
भगवान जगन्नाथ की बड़ी आँखों का रहस्य 

भगवान जगन्नाथ की बड़ी-बड़ी आँखों के पीछे एक बेहद भावुक कथा जुड़ी है। जब भगवान श्रीकृष्ण द्वारका में निवास कर रहे थे, तब एक दिन रोहिणी माता वहाँ के लोगों को वृंदावन की रासलीलाओं की कथा सुना रही थीं। श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा जी दरवाजे के बाहर खड़े होकर वह कथा चुपचाप सुन रहे थे। कथा इतनी भावपूर्ण थी कि तीनों भाई-बहन प्रेम और विस्मय से भर उठे, और उनकी आँखें आश्चर्य से फैल गईं। उसी समय नारद मुनि वहाँ आए और उन्हें इस रूप में देखकर अत्यंत भावुक हो गए। उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिव्य रूप सदा भक्तों को भी देखने को मिले।

नारद मुनि की उस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए भगवान ने यह रूप स्थायी बना लिया। तभी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ उसी रूप में बनाई जाती हैं, बड़ी गोल आँखों और सरल, बिना विस्तार वाले शरीर के साथ। यह रूप न केवल एक कथा का प्रतिबिंब है, बल्कि भक्तों के प्रेम और भगवान की भावनात्मक संवेदनशीलता का प्रतीक भी बन गया है।
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Mystery Behind Lord Jagannath Murti  - फोटो : adobe stock
भक्तों की श्रद्धा से जन्मा दिव्य नेत्रस्वरूप
एक और कथा के अनुसार, जब भगवान जगन्नाथ राजा इंद्रद्युम्न के राज्य में प्रकट हुए थे, तो उनके रूप के दर्शन कर वहां के लोग स्तब्ध रह गए थे। उनकी आंखें श्रद्धा और विस्मय से इतनी फैल गईं कि भगवान ने भी उनकी भक्ति को सम्मान देते हुए अपनी आँखें उसी तरह बड़ी कर लीं। यह रूप दिखाता है कि भगवान अपने भक्तों की भावनाओं को कैसे आत्मसात कर लेते हैं और उसी अनुरूप अपना स्वरूप बदल लेते हैं।

भक्तों का मानना है कि भगवान की यह विशाल और अटूट दृष्टि दर्शाती है कि वे हर समय, हर भक्त पर ध्यान रखते हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार, मूर्तिकारों ने जानबूझकर भगवान की आँखें बड़ी बनाईं ताकि उनका स्वरूप देखते ही श्रद्धा जागृत हो। साथ ही यह भी विश्वास है कि उनकी दृष्टि नेत्र रोगों से पीड़ित लोगों के लिए आशीर्वाद और उपचार का प्रतीक है। इस प्रकार, भगवान जगन्नाथ की आँखें केवल शरीर का अंग नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और चमत्कार की प्रतीक हैं।
 
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Mystery Behind Lord Jagannath Murti  - फोटो : adobe stock
भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम की मूर्तियों में हाथ-पैर क्यों नहीं होते?
एक समय राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम की मूर्तियाँ बनवाने का निर्णय लिया। उन्होंने विश्वकर्मा जी को ये मूर्तियाँ बनाने के लिए बुलाया। विश्वकर्मा जी ने मूर्ति निर्माण की एक शर्त रखी कि जब तक ये मूर्तियाँ पूरी तरह से तैयार न हो जाएं, कोई भी उस कमरे में प्रवेश नहीं करेगा। कुछ दिनों तक कमरे के अंदर मूर्ति बनाने की आवाज़ें आती रहीं, लेकिन अचानक ये आवाज़ें बंद हो गईं। राजा को लगा कि काम पूरा हो गया है, इसलिए वे बिना किसी अनुमति के कमरे में प्रवेश कर गए। इस वजह से विश्वकर्मा जी का क्रोध भड़क उठा क्योंकि उनकी शर्त टूट गई थी। उन्होंने मूर्तियों का निर्माण अधूरा छोड़ दिया और वे मूर्तियाँ हाथ-पैर के बिना ही रह गईं। यही कारण है कि भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम की मूर्तियां हाथ-पैर रहित दिखाई देती हैं। 



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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