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Lathmar Holi 2026: क्यों खास है बरसाना-नंदगांव की लट्ठमार होली? जानें इतिहास और तारीख

Wed, 25 Feb 2026 10:46 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Braj Ki Holi: ब्रज में होली का उत्सव बसंत पंचमी से आरंभ होकर लगभग 40 दिनों तक उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है। बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली अपनी अनोखी परंपरा और राधा-कृष्ण से जुड़ी लोककथाओं के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। 2026 में यह विशेष उत्सव फरवरी के अंतिम सप्ताह में आयोजित होगा, जब हजारों श्रद्धालु और पर्यटक ब्रज पहुंचेंगे। यह पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक भी है।

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लट्ठमार होली 2026 - फोटो : amar ujala

Importance Of LathMar Holi: हिंदू धर्म में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, उल्लास और परंपरा का महापर्व माना जाता है। देशभर में यह पर्व फाल्गुन पूर्णिमा के दिन धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन ब्रजभूमि में इसकी रौनक कुछ अलग ही होती है। यहां होली की शुरुआत बसंत पंचमी से मानी जाती है और उत्सव का सिलसिला करीब 40 दिनों तक चलता है। मंदिरों, गलियों और चौपालों में हर दिन रंग, गुलाल, भजन और रसिया की गूंज सुनाई देती है।
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ब्रज की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है, जहां हर दिन अलग अंदाज में उत्सव मनाया जाता है। इन्हीं में सबसे खास बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली है, जो अपनी अनोखी परंपरा और राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी मान्यताओं के कारण विशेष पहचान रखती है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष ब्रज की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली कब खेली जाएगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
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लट्ठमार होली 2026 - फोटो : amar ujala

लट्ठमार होली 2026 तिथि
ब्रज मंडल में होली का उत्सव बसंत पंचमी से ही प्रारंभ हो जाता है, लेकिन रंगों की असली धूम रंगभरनी एकादशी के बाद देखने को मिलती है। इसी समय से ब्रज में अलग-अलग परंपराओं के साथ होली खेली जाती है कहीं लड्डूमार होली तो कहीं प्रसिद्ध लट्ठमार होली। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाने वाली लट्ठमार होली का नज़ारा देखने के लिए हर साल देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग ब्रज पहुंचते हैं।

पंचांग के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल नवमी तिथि 26 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 2:40 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसी आधार पर 25 फरवरी 2026 को बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाएगी, जबकि अगले दिन 26 फरवरी 2026 को नंदगांव में यह अनोखा उत्सव मनाया जाएगा।

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लट्ठमार होली - फोटो : instagram

कैसे हुई लट्ठमार होली की शुरुआत
लाठी और ढाल के साथ खेली जाने वाली लट्ठमार होली की परंपरा का संबंध राधा-कृष्ण की लोककथाओं से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि एक बार श्रीकृष्ण अपने सखा-ग्वालों के साथ राधा रानी से मिलने बरसाना पहुंचे। उस समय हंसी-मजाक के दौरान कान्हा ने राधा जी और उनकी सखियों को चिढ़ाना शुरू कर दिया।
कृष्ण की इस शरारत से नाराज़ होकर राधा रानी और सखियों ने उन्हें सबक सिखाने के लिए लाठियां उठा लीं और ग्वाल-बालों को दौड़ा लिया। कहा जाता है कि उसी प्रसंग की स्मृति में यह परंपरा शुरू हुई, जहां आज भी पुरुष ढाल लेकर आते हैं और महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से लाठी से प्रहार करती हैं। समय के साथ यह रसपूर्ण घटना एक सांस्कृतिक उत्सव में बदल गई, जिसे आज बरसाना और नंदगांव में बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया जाता है।

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लट्ठमार होली - फोटो : instagram

लट्ठमार होली का धार्मिक महत्व

ब्रज में मनाई जाने वाली लट्ठमार होली केवल रंगों और उत्साह का पर्व नहीं है, बल्कि यह गहरी धार्मिक आस्था और राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं से जुड़ा एक आध्यात्मिक उत्सव है। इस परंपरा में नंदगांव के पुरुष और बरसाना की महिलाएं विशेष रूप से भाग लेती हैं, जो राधा और कृष्ण की प्रतीकात्मक भूमिका निभाते हैं। महिलाएं घूंघट ओढ़कर हाथों में लट्ठ लेकर पुरुषों पर हल्के और प्रतीकात्मक प्रहार करती हैं, जबकि पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। यह पूरा दृश्य उस पौराणिक प्रसंग की याद दिलाता है जब श्रीकृष्ण ने बरसाना पहुंचकर राधा और उनकी सखियों से हंसी-मजाक किया था।

धार्मिक दृष्टि से यह उत्सव प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। लट्ठमार होली के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, राधा-कृष्ण के श्रृंगार दर्शन और कीर्तन आयोजित किए जाते हैं। रसिया गायन, भजन और पारंपरिक नृत्य पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। श्रद्धालु इसे केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का अवसर मानते हैं।

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