फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Krishna Janmashtami 2026: कब है श्री कृष्ण जन्माष्टमी? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Sat, 22 Aug 2026 01:23 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Krishna Janmashtami 2026: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2026 में जन्माष्टमी की तारीख, पूजा का शुभ समय और पूजन विधि।
विज्ञापन
1 of 5
कब है श्री कृष्ण जन्माष्टमी? - फोटो : AI
Krishna Janmashtami 2026: कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व रक्षाबंधन के कुछ दिनों बाद आता है। धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा में माता देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था। वैसे तो अष्टमी तिथि हर महीने आती है, लेकिन भाद्रपद कृष्ण अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु उपवास रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए आधी रात के समय पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं साल 2026 में जन्माष्टमी की तारीख, पूजा का शुभ समय और पूजन विधि।
विज्ञापन

2 of 5
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है? - फोटो : Adobe Stock
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है?
साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर को रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।
विज्ञापन

3 of 5
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त - फोटो : Adobe Stock
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु 5 सितंबर की सुबह 6:01 बजे के बाद पारण कर सकते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 चौघड़िया मुहूर्त
चर: सुबह 6:00 से 7:35 बजे तक
लाभ: सुबह 7:35 से 9:10 बजे तक
अमृत: सुबह 9:10 से 10:45 बजे तक
शुभ: दोपहर 12:20 से 1:55 बजे तक
चर: शाम 5:05 से 6:39 बजे तक
लाभ: रात 9:30 से 10:55 बजे तक
शुभ: 5 सितंबर की रात 12:20 से 1:45 बजे तक

4 of 5
जन्माष्टमी की पूजन विधि - फोटो : adobe stock
जन्माष्टमी की पूजन विधि
जन्माष्टमी पर श्रद्धालु सुबह से ही व्रत और पूजा की तैयारियां शुरू कर देते हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद रात में भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। पूजा से पहले बाल गोपाल के लिए भोग और प्रसाद तैयार किया जाता है।

मध्यरात्रि के समय भगवान कृष्ण की प्रतिमा या बाल स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें नए और साफ वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है। पूजा में मोरपंख, बांसुरी और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद बाल गोपाल को झूले में विराजमान कर झूला झुलाया जाता है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
जन्माष्टमी की पूजन विधि - फोटो : adobe stock
अंत में भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, खीर और अन्य प्रसाद का भोग लगाया जाता है। दीप जलाकर श्रीकृष्ण की आरती की जाती है और उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। कुछ श्रद्धालु मध्यरात्रि की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कई लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं।

South Indian Festivals: दक्षिण भारत के 16 अनोखे व्रत-त्योहार, उत्तर भारत में नहीं हैं इतने प्रचलित
2026 Hindu Festival Dates: कब है पितृ पक्ष, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा? देखें तिथि सहित पूरा कैलेंडर

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें