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श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2026: जन्माष्टमी पर 7 शुभ योगों का महासंयोग, जानें निशीथ काल, चौघड़िया और पूजन विधि

Thu, 03 Sep 2026 12:20 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Krishna Janmashtami 2026: इस बार जन्माष्टमी का पर्व कई शुभ संयोगों के साथ खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन 7 शुभ योग बनेंगे, जिससे कृष्ण पूजा का महत्व और बढ़ सकता है। आइए जानते हैं जन्माष्टमी का निशीथ काल, चौघड़िया और भगवान कृष्ण की सरल पूजन विधि।
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Krishna Janmashtami 2026 - फोटो : अमर उजाला
Krishna Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस साल 4 सितंबर 2026 को कान्हा के जन्मोत्सव का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी पर आधी रात के समय भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस बार यह पर्व ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जन्माष्टमी पर 7 शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इस दिन की धार्मिक महत्ता को बढ़ा सकता है। ऐसे में भक्तों के लिए सही पूजा मुहूर्त, निशीथ काल और चौघड़िया जानना जरूरी हो जाता है। आइए जानते हैं जन्माष्टमी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, चौघड़िया और बाल गोपाल की सरल पूजन विधि।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

कब मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी?
हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को रात 2:25 बजे से शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। धार्मिक परंपराओं में जन्माष्टमी की तिथि तय करते समय केवल अष्टमी तिथि को ही आधार नहीं माना जाता, बल्कि मध्यरात्रि के समय और रोहिणी नक्षत्र की स्थिति का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। इन्हीं गणनाओं के आधार पर इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा।

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krishna janmashtami 2026 - फोटो : amar ujala

जन्माष्टमी पर बनेंगे 7 शुभ योग
इस बार कृष्ण जन्माष्टमी को खास बनाने वाले कई शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन जयंती योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग, हंस योग, मालव्य योग, बुधादित्य राजयोग और नवपंचम राजयोग बनने की बात कही जा रही है। धार्मिक मान्यताओं में शुभ योगों के दौरान पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त इस अवसर पर श्रीकृष्ण की आराधना करके सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर सकते हैं।

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krishna janmashtami 2026 - फोटो : amar ujala

जन्माष्टमी पूजा का शुभ समय
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए दिन और रात में अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। हालांकि कृष्ण जन्मोत्सव के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक।
  • निशीथ काल: रात 11:57 बजे से मध्यरात्रि 12:43 बजे तक।

 

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4 सितंबर 2026 का शुभ चौघड़िया - फोटो : adobe stock

4 सितंबर 2026 का शुभ चौघड़िया

जन्माष्टमी के दिन पूजा-पाठ या धार्मिक कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ चौघड़िया का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 4 सितंबर को प्रमुख शुभ समय इस प्रकार बताए गए हैं:

  • लाभ चौघड़िया: सुबह 7:35 बजे से 9:10 बजे तक।
  • अमृत चौघड़िया: सुबह 9:10 बजे से 10:45 बजे तक।
  • शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:20 बजे से 1:55 बजे तक।
  • निशीथ काल: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक।
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बाल गोपाल को भोग लगाने के नियम - फोटो : Instagram
बाल गोपाल को भोग लगाने के नियम

जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को भोग अर्पित करते समय शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है। भगवान श्रीकृष्ण को बाल रूप में माखन-मिश्री समेत कई सात्विक चीजें प्रिय मानी जाती हैं।

  • बाल गोपाल को हमेशा सात्विक और शुद्ध भोजन का भोग लगाएं।
  • भोग तैयार करते समय साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।
  • भोग रखने वाले बर्तनों को अच्छी तरह साफ करके ही इस्तेमाल करें।
  • भोग में मिठाई या अन्य मीठे पकवान शामिल किए जा सकते हैं।
  • भगवान को अर्पित किए जाने वाले जल और भोग में तुलसी दल जरूर रखें।
  • बाल गोपाल को जल अर्पित करने के लिए स्वच्छ पात्र का इस्तेमाल करें।
  • जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में माखन-मिश्री का भोग लगाना विशेष परंपरा मानी जाती है।
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जन्माष्टमी पर ऐसे करें बाल गोपाल की पूजा - फोटो : अमर उजाला

जन्माष्टमी पर ऐसे करें बाल गोपाल की पूजा

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्त को भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के लिए पहले घर के मंदिर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। भगवान के स्वागत के लिए घर और मंदिर को फूलों, रोशनी और रंगोली से सजाया जा सकता है।
  • पूजा की तैयारी के लिए आसन, झूला, पाद्य, पंचामृत, आचमन के लिए जल, स्नान सामग्री, फूल, धूप, दीप और भोग आदि सामग्री रख सकते हैं। पूजा की सभी वस्तुएं स्वच्छ होनी चाहिए।
  • जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके पूजा और भगवान श्रीकृष्ण के ध्यान से दिन की शुरुआत करें। रात में पूजा स्थल को सुंदर तरीके से सजाएं और भगवान के जन्म के समय यानी निशीथ काल में दीप प्रज्वलित करके जन्मोत्सव मनाएं।
  • सबसे पहले चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं और उस पर बाल गोपाल को विराजमान करें। इसके बाद उन्हें पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं। स्नान के बाद भगवान को साफ एवं नए वस्त्र पहनाएं। उन्हें तिलक लगाएं और फूल, तुलसी दल आदि अर्पित करें।
  • इसके बाद बाल गोपाल को माखन-मिश्री और अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें। धूप और दीप जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और श्रद्धापूर्वक उनका ध्यान करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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