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Krishna Janmashtami 2025: कब है जन्माष्टमी? यहां जानें तिथि, पूजा विधि और इसका महत्व

Wed, 28 May 2025 07:52 PM IST
शिखर बरनवाल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Krishna Janmashtami 2025: कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस वर्ष यह त्योहार अगस्त के महीने में पड़ेगा। आइए इस लेख में कृष्ण जन्माष्टमी से संबंधित सभी बातों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
Krishna Janmashtami 2025 Date :श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और उनकी लीलाओं का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। मथुरा और वृंदावन में यह पर्व विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि 2025 में जन्माष्टमी कब है, पूजा करने की सही विधि क्या है और इस त्योहार का क्या महत्व है? 
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
कब है जन्माष्टमी 2025?
वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व शुक्रवार, 15 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। जन्माष्टमी की पूजा का सबसे शुभ समय निशिता काल में होता है, जो मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के समय को दर्शाता है।

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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
जन्माष्टमी की पूजा विशेष रूप से मध्यरात्रि में की जाती है, जिसे निशिता पूजा कहा जाता है।

निशिता पूजा का समय: 16 अगस्त 2025 को 12:04 AM से 12:47 AM तक (कुल 43 मिनट की अवधि)
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त 2025 को 11:49 PM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त 2025 को 09:34 PM बजे
दही हांडी: 16 अगस्त 2025 (शनिवार)

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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
जन्माष्टमी पूजा विधि
जन्माष्टमी की पूजा विधि भक्ति और श्रद्धा से भरी होती है। सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर फलाहार (फल, दूध, पानी) ग्रहण करें और सात्विक रहें। रात में पूजा की तैयारी करें। सबसे पहले एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर लड्डू गोपाल (श्रीकृष्ण की बाल मूर्ति) को स्थापित करें। मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) से स्नान कराएं, फिर गंगाजल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछें। इसके बाद लड्डू गोपाल को नए वस्त्र, मुकुट, मोरपंख और बांसुरी से सजाएं।

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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
जन्माष्टमी का महत्व
जन्माष्टमी का पर्व धर्म की अधर्म पर जीत और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भगवान कृष्ण ने धरती पर धर्म की स्थापना और अधर्मियों का नाश करने के लिए अवतार लिया था। इस दिन व्रत रखने और भगवान कृष्ण की पूजा करने से भक्तों को संतान प्राप्ति, सुख-समृद्धि, लंबी आयु और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पर्व हमें भगवान कृष्ण के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का अवसर देता है, जो हमें कर्म, प्रेम और भक्ति का मार्ग सिखाती हैं।
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