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Krishna Janmashtami 2022: क्या था कुब्जा और श्रीकृष्ण का संबंध? बड़ा रोचक है पहली मुलाकात का प्रसंग

Thu, 18 Aug 2022 11:50 AM IST
संकल्प सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कृष्णा जन्माष्टमी 2022 - फोटो : Istock
हमारे पौराणिक धर्म ग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण का एक महत्वपूर्ण स्थान है। आज दुनियाभर में श्रीकृष्ण के करोड़ों भक्त हैं। भगवान कृष्ण बहुव्यक्तित्व के धनी थे। उनके चरित्र में आपको योद्धा, संगीतज्ञ, छलिया आदि कई गुण देखने को मिलते हैं। भगवान कृष्ण 64 कलाएं और 14 विद्याओं में निपुण थे। कंस वध से लेकर महाभारत में धर्म की स्थापना तक श्रीकृष्ण के जीवन में कई लीलाएं और चकित करने वाले प्रसंग हैं। श्रीकृष्ण की कहानियां हम लोग बचपन से सुनते आ रहे हैं। वहीं क्या आपको कृष्ण और कुब्जा के प्रसंग के बारे में पता है। आप में से बेहद कम लोग ही श्रीकृष्ण और कुब्जा के इस रोचक प्रसंग के बारे में जानते होंगे। हिंदू पौराणिक मान्यताओं में कृष्ण और कुब्जा का एक खूबसूरत संदर्भ मिलता है। इसी कड़ी में आज हम आपको कंस की नगरी मथुरा में रहने वाली कुब्जा नामक स्त्री के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -
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कृष्णा जन्माष्टमी 2022 - फोटो : iStock
कुब्जा कंस की दासी थी। वह रोजाना कंस के लिए चंदन, तिलक और फूल को संग्रह करती थी। कंस, कुब्जा का उसके प्रति प्यार को देखकर काफी खुश था। पौराणिक मान्यताओं की मानें तो कुब्ड़ होने की वजह से उसको कुब्जा नाम मिला था।
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कृष्णा जन्माष्टमी 2022 - फोटो : iStock
कुब्जा की मुलाकात श्रीकृष्ण के साथ कंस वध के दौरान होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक दिन कुब्जा चंदन, तिलक और फूलों का हार लेकर कंस के पास जा रही थी। इसी बीच रास्ते में उसे भगवान श्रीकृष्ण मिलते हैं। इस दौरान भगवान कुब्जा से आग्रह करते हैं कि वह ये तिलक, फूल और हार उनको अर्पित करे।

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कृष्णा जन्माष्टमी 2022 - फोटो : iStock
कृष्ण के इस आग्रह को कुब्जा अस्वीकार करते हुए कहती है कि ये तिलक, चंदन और हार महाराज कंस के लिए है। मैं इसे उन्हें ही अर्पित करूंगी। हालांकि, भगवान द्वारा बारबार हठ करने पर कुब्जा मान जाती है और उनको तिलक, चंदन और फूलों का हार चढ़ाती है।
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कृष्णा जन्माष्टमी 2022 - फोटो : Istock
कुब्जा कुबड़ी थी, इस वजह से वह भगवान श्रीकृष्ण के माथे पर तिलक नहीं लगा पा रही थी। कुब्जा की इस पीड़ा को देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण से रहा नहीं गया। उन्होंने उसके पैरों के दोनों पंजों को दबाकर ऊपर उठा लिया। 
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कृष्णा जन्माष्टमी 2022 - फोटो : Istock
देखते ही देखते कुब्जा का कुबड़ापन ठीक हो जाता है। कुबड़ापन ठीक होते ही कुब्जा भगवान के माथे पर टीका लगाने में सफल हो पाती है। पौराणिक मान्यताओं की मानें तो भगवान ने कुब्जा के साथ प्रेम क्रीड़एं भी की थीं।
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