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Basant Panchami 2019 : जानें मां सरस्वती की वीणा से आपकी वाणी का क्या है संबंध?

Tue, 05 Feb 2019 08:40 PM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
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बसंत पंचमी 2019
शरद ऋतु की विदाई के साथ माघ शुक्ल पंचमी जहां एक ओर ऋतुराज वसंत के आगमन का सूचक है वहीं दूसरी ओर संगीत व विद्या की देवी वीणावादिनी माँ सरस्वती के अवतरण का दिन भी है। वसंत पंचमी को सभी  शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है। इस पावन तिथि को मुख्य रूप से विद्यारंभ, नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह-प्रवेश के लिए शुभ माना गया है। 
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बसंत पंचमी 2019
बसंत ऋतु में सरस्वती साधना
महाकवि कालिदास ने ऋतुसंहार नामक काव्य में इसे ''सर्वप्रिये चारुतर वसंते'' कहकर अलंकृत किया है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ''ऋतूनां कुसुमाकराः'' अर्थात मैं ऋतुओं में वसंत हूं, कहकर वसंत को अपना स्वरुप बताया है। वसंत पंचमी के दिन ही कामदेव और रति ने पहली बार मानव ह्रदय में प्रेम और आकर्षण का संचार किया था। इस दिन कामदेव और रति के पूजन का उद्देश्य दांपत्त्य जीवन को सुखमय बनाना है, जबकि सरस्वती पूजन का उद्देश्य जीवन में अज्ञानरुपी  अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश उत्त्पन्न करना है।
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सरस्वती देवी
ऐसे हुआ देवी सरस्वती का प्राकट्य
सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने जीवों खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगा कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया हुआ है। भगवान विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कम्पंन होने लगा। इसके बाद   एक चतुर्भुजी स्त्री के रूप में अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थीं।

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बसंत पंचमी 2019
ऐसे मिली जीव-जंतुओं को वाणी 
ब्रह्मा जी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुर नाद किया, संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया व पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादिनी और बाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि की प्रदाता हैं, संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी कहलाती हैं।
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बसंत पंचमी 2019
सरस्वती पूजा का रहस्य 
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार वसंत पंचमी के दिन श्री कृष्ण ने माँ सरस्वती को वरदान दिया - सुंदरी! प्रत्येक ब्रह्मांड में माघ शुक्ल पंचमी के दिन विद्या आरम्भ के शुभ अवसर पर बड़े गौरव के साथ तुम्हारी विशाल पूजा होगी। मेरे वर के प्रभाव से आज से लेकर प्रलयपर्यन्त प्रत्येक कल्प में मनुष्य, मनुगण, देवता, मोक्षकामी, वसु, योगी, सिद्ध, नाग, गन्धर्व और राक्षस -सभी बड़ी भक्ति के साथ तुम्हारी पूजा करेंगे। पूजा के पवित्र अवसर पर विद्वान पुरुषों के द्वारा तुम्हारा सम्यक् प्रकार से स्तुति-पाठ होगा। वे कलश अथवा पुस्तक में तुम्हें आवाहित करेंगे। इस प्रकार कहकर सर्वपूजित भगवान श्री कृष्ण ने सर्वप्रथम देवी सरस्वती की पूजा की, तत्पश्चात ब्रह्मा, विष्णु , शिव और इंद्र आदि देवताओं ने भगवती सरस्वती की आराधना की। तबसे माँ सरस्वती सम्पूर्ण प्राणियों द्वारा सदा पूजित होने लगीं। 
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बसंत पंचमी 2019
इस पूजा से प्रसन्न होंगी माँ सरस्वती 
सत्वगुण से उत्पन्न होने के कारण इनकी पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियां अधिकांशः सफेद रंग की होती हैं जैसे — सफेद चन्दन, सफेद वस्त्र, सफेद फूल, दही-मक्खन, सफ़ेद तिल का लड्डू, अक्षत, घृत, नारियल और इसका जल, श्रीफल, बेर इत्यादि। बसंत पंचमी के दिन सुबह स्नानादि के पश्चात सफेद अथवा पीले कपड़े पहनकर विधिपूर्वक कलश स्थापना करें। माँ सरस्वती के साथ भगवान गणेश, सूर्यदेव, भगवान विष्णु व शिवजी की भी पूजा अर्चना करें। श्वेत फूल-माला के साथ माता को सिन्दूर व अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करें। बसंत पंचमी के दिन माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित करने का विधान है। प्रसाद में माँ को पीले रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं।

बसंत पंचमी के दिन यथाशक्ति ''ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः '' का जाप करें। माँ सरस्वती का बीजमंत्र '' ऐं '' है, जिसके उच्चारण मात्र से ही बुद्धि विकसित होती है। इस दिन से ही बच्चों को विद्या अध्ययन प्रारम्भ करवााना चाहिए। ऐसा करने से बुद्धि कुशाग्र होती है और माँ की कृपा जीवन में सदैव बनी रहती है।
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