Chand Na Dikhne Par Kya Kre: शुभ संयोगों के साथ करवा चौथ का पावन पर्व प्रारंभ हो चुका है। यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास है। मान्यता है कि इस तिथि पर महिलाएं माता करवा की पूजा करती हैं और पति की दीर्घायु की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। शास्त्रों के मुताबिक करवा चौथ प्रेम और त्याग का त्योहार है। यह न केवल रिश्तों में मिठास लाता है बल्कि व्यक्ति को भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाता है। इस वर्ष करवा चौथ पर कृत्तिका नक्षत्र का संयोग बना हुआ है, जिसमें पूजा-पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके अलावा शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान है। कहते हैं कि करवा चौथ के व्रत का प्रारंभ जहां सरगी से होता है, वहीं पारण चंद्र दर्शन के बाद किया जाता है। लेकिन कई बार मौसम में बदलाव के कारण चंद्रमा को देखना मुश्किल होता है। ऐसे में व्रती को पूजा करने में समस्याएं आती हैं। हालांकि, आप इस एक देवता के पूजन से भी व्रत को खोल सकती हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं।