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कब और कैसे शुरू हुई शिव की प्रिय कांवड़ यात्रा, जानें इससे जुड़ी खास बातें

Wed, 01 Aug 2018 08:34 AM IST
धर्म डेस्क,अमर उजाला
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kanwar yatra 2018
सावन के महीने को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। यही कारण है कि इस दौरान शिव की प्रिय कांवड़ यात्रा निकाली जाती है। क्या आपको मालूम है कि इसकी शुरुआत कब और किसने की? आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा से जुड़ी मान्यताओं के बारे में...
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kanwar yatra 2018 - फोटो : amar ujala
माना जाता है कि सबसे पहले कांवडिया भगवान राम थें। उन्होंने सुल्तानगंज से कांवड़ में गंगाजल लाकर बाबाधाम के शिवलिंग का जलाभिषेक किया था। कांवड़ यात्रा से जुड़ी कई कथा प्रचलित है। मान्यता है कि सबसे पहले भगवान शिव के परमभक्त परशुराम ने सबसे पहली कांवड़ उठाई थी। उन्हें पहला कांवड़ भी माना जाता है। 
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kanwar yatra 2018
कुछ लोगों का मानना है कि श्रवण कुमार ने कांवड की परंपरा की शुरुआत की थी। वह अपने दृष्टिहीन माता-पिता की हरिद्वार में गंगा स्नान करने की इच्छा को पूरा करने के लिए उन्हें कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार गंगा स्नान करान लाए थे। माना जाता है तभी से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई।

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kanwar yatra - फोटो : amar ujala
पुराणों केे अनुसार इस यात्रा की शुरुआत समुद्र मंथन के समय हुई थी। समुद्रमंथन के दौरान निकले हलाहल विष को पीने के बाद भगवान शिव का गला नीला हो गया था।  साथ ही उनके शरीर में बुरा असर पड़ने लगे थे। जिसे देखकर देवता चिंतित हो उठे। विष के प्रभाव को कम करने के लिए चिंतित देवताओं ने पवित्र और शीतलता का पर्याय गंगा जंल शिव के शरीर में चढ़ाया।
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kanwar
गंगा जल से शिवजी का जलाभिषेक करने से कुछ ही समय में देवताओं की मेहनत रंग लाई और भोलेनाथ का शरीर सामान्य होने लगा। इसी कार्य को आगे बढ़ाते हुए कांवडिये हरिद्वार से गंगा जल लेकर नीलकंठ महादेव में चढ़ाते हैं। यह यात्रा सदियों से चली आ रही है। 
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