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Kajari Teej 2026: इन 3 महिलाओं को नहीं रखना चाहिए कजरी तीज का व्रत, जानें वजह

Wed, 19 Aug 2026 03:32 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Kajari Teej 2026: कजरी तीज का पर्व भाद्रपद माह में मनाया जाता है। यह सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में कजरी तीज का त्योहार 31 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।
 
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Kajari Teej 2026 - फोटो : amarujala
Kajari Teej 2026: हर साल कजरी तीज का पर्व भाद्रपद माह में मनाया जाता है। यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, प्रेम और मधुरता बनाए रखने के लिए उपवास रखती हैं। साथ ही पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए पर्व से जुड़े सभी नियमों का पालन भी किया जाता है। मान्यता है कि, कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है। इसलिए यह दिन न केवल व्रत बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और अपनापन बढ़ाने का भी प्रतीक है। यही कारण है कि, महिलाएं कजरी तीज  के लिए काफी समय पहले से तैयारी करती हैं और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करती हैं। हालांकि, कुछ महिलाओं को यह उपवास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह उपवास निर्जला होता है। ऐसे में आइए जानते हैं किन महिलाओं को कजरी तीज का व्रत रखने में सावधानी बरतनी चाहिए।
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Kajari Teej 2026 - फोटो : istock
कजरी तीज 2026
  • भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 31 अगस्त 2026, सोमवार को रहेगी।
  • तृतीया तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2026, रविवार, सुबह करीब 9 बजकर 36 मिनट पर।
  • तृतीया तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026, सोमवार, सुबह करीब 8 बजकर 50 मिनट पर।
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Kajari Teej 2026 - फोटो : freepik
कजरी तीज 2026 शुभ मुहूर्त
  • अमृत चौघड़िया- सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक।
  • शुभ चौघड़िया- सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक।
  • लाभ चौघड़िया- दोपहर 3 बजकर 32 मिनट से शाम 5 बजकर 8 मिनट तक।
  • अमृत चौघड़िया- शाम 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक।

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Kajari Teej 2026 - फोटो : AI
सेहत से जुड़ी परेशानी वाली महिलाएं
कहा जाता है कि, जिन महिलाओं को बीमारी या सेहत से जुड़ी कोई परेशानी है, उन्हें कजरी तीज का यह निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए। व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है। 
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Kajari Teej 2026 - फोटो : AI
गर्भवती महिलाएं
मान्यता है कि, गर्भवती महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए इस उपवास को नहीं रखना चाहिए। निर्जला उपवास करने से कमजोरी या अन्य परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए आप महादेव और पार्वती माता की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना कर सकती है।

यात्रा पर या घर से बाहर रहने वाली महिलाएं
अगर आप किसी यात्रा पर हैं या अपने घर से बाहर हैं और व्रत व पूजा से जुड़े नियमों का पालन करना संभव नहीं है, तो कठिन व्रत रखने से बचना बेहतर हो सकता है। पूजा पूरी श्रद्धा और अपनी परिस्थितियों के अनुसार की जा सकती है। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ की गई पूजा भी शुभ फल प्रदान करती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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