जीवित्पुत्रिका पर्व पर पूजन करतीं महिलाएं
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Jitiya Vrat 2020: जितिया व्रत सुहागिन महिलाओं के द्वारा रखा जाता है। महिलाएं यह व्रत अपनी संतान के सुखी जीवन और उसकी लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस व्रत को जिउतिया व्रत और जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। शास्त्रों में इस व्रत को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना व्रत में जरूरी होता है। ये नियम इस प्रकार हैं...
- यह व्रत तीन दिनों तक चलता है। पहला दिन नहाए खाए कहलाता है। दूसरा दिन जितिया निर्जला व्रत और तीसरे दिन इस व्रत का विधिनुसार पारण किया जाता है।
- व्रत के पहले दिन नहाए खाए में सूर्यास्त के बाद कुछ नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से व्रत खंडित माना जाता है, जिसका फल व्रती को नहीं मिलता है और परिणाम स्वरूप संतान को भी कष्ट झेलने पड़ते हैं।
जीवित्पुत्रिका व्रत 2020
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- नहाए खाए के दिन व्रती के परिजनों को भी कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। खासकर भोजन में लहसुन प्याज नहीं डालना चाहिए और न ही किसी प्रकार का तामसिक भोजन करना चाहिए।
- नहाए खाए के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस दिन नाखून भी गलती से नहीं काटने चाहिए। दरअसल जितिया व्रत को परम पावन माना गया है। इसलिए इस दौरान अशुद्ध और मलिन कार्यों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
- इस अवधि में मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहए। क्योंकि ऐसा करने से देवी-देवता क्रोधित हो जाते हैं। इसके परिणाम स्वरूप व्रती के संतान को कष्ट होता है। इस व्रत में आपको इन सभी चीजों से दूर रहना चाहिए।
- इस व्रत में झूठ नहीं बोलना चाहिए और न ही किसी पर क्रोधित होना चाहिए। व्रत में झूठ बोलना पाप माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि झूठ बोलने से व्रत खंडित हो जाता है और व्रती को उसकी श्रद्धा का फल नहीं मिलता है।
- इसके अलावा व्रत में किसी के प्रति द्वेष की भावना नहीं रखना चाहिए और न ही किसी से अपशब्द बोलना चाहिए। लड़ाई-झगड़े, शारीरिक संबंध आदि से दूर रहना चाहिए। ऐसा करने से व्रती पाप का भागीदारी बनता है और संतान को दीर्घायु व सुखी जीवन प्राप्त होता है।