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Jaya Ekadashi 2026: 29 या 30 जनवरी कब है जया एकादशी ? जानें तिथि और पूजा मुहूर्त

Tue, 20 Jan 2026 02:59 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jaya Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में जया एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। इस तिथि पर पूजा-पाठ करने से कार्यों में मनचाही सफलता मिलती है। साथ ही आत्मशुद्धि और सुख-समृद्धि भी प्राप्त होती हैं।
 
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Jaya Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला
Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष में रखा जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, इस तिथि पर विष्णु भगवान की उपासना करने से व्यक्ति को जीवन के हर कार्य में सफलता मिलती है। साथ ही देवी लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत रखने से शत्रुओं और विरोधियों से राहत मिलती है। इसके अलावा नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव भी समाप्त होता है। इस बार जया एकादशी की तिथि को लेकर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, नववर्ष 2026 में यह व्रत कब रखा जाएगा।
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जया एकादशी - फोटो : adobe stock
जया एकादशी 2026
  • इस साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026 को शाम 04 बजकर 35 मिनट से प्रारंभ हो रही है।
  • यह तिथि 29 जनवरी 2026 को दोपहर 01 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी।
  • उदया तिथि के अनुसार, जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को रखा जाएगा।
  • व्रत का पारण 30 जनवरी 2026 को सुबह 6:41 से सुबह 8:56 तक की अवधि में किया जाएगा।

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जया एकादशी - फोटो : freepik
जया एकादशी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त 
जया एकादशी के दिन सुबह 7 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 32 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 14 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक है। इस तिथि पर रोहिणी और मृगशिर्षा नक्षत्र का संयोग रहेगा। इसके अलावा ऐन्द्र योग का संयोग भी बना रहेगा।

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जया एकादशी - फोटो : adobe stock
जया एकादशी पूजा विधि
  • जया एकादशी पर पूजा के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं और विष्णु जी की मूर्ति स्थापित कर लें।
  • अब पूरे पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें और प्रभु को पीले फूल अर्पित करें।
  •  'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करते हुए शुद्ध देसी घी का दीप जलाएं।
  • विष्णु जी को पंचामृत का भोग लगाएं और देवी लक्ष्मी को भी फूल अर्पित करें।
  • अब पीली मिठाई, फल व गुड़ भोग के रूप में शामिल करें।
  • विष्णु जी के 108 नामों का जाप करें।
  • एकादशी की कथा का पाठ करें और अंत में विष्णु जी की आरती भी करें।
  • अगले दिन व्रत पारण से पहले क्षमतानुसार चीजों का दान करें।

श्रीहरि विष्णु को प्रसन्न करने के लिए 
दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्। 
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
शांताकारम भुजङ्गशयनम पद्मनाभं सुरेशम। 
विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम। 
लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म। 
वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम। 
ॐ नमोः नारायणाय नमः। 
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः। 
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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