श्री कृष्ण माखन चोरी लीला
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कृष्ण माखन चोर लीला 3
कान्हा की माखन चोरी की यह लीला आरंभ होती है चिकसोले वाली गोपी के यहां से। कन्हैया ने अपनी एक टोली तैयार की। इस टोली में सुबल, मंगल, सुमंगल, सुदामा, तोसन, आदि शमिल हैं। इसको आप चोर मंडली भी कह सकते हैं। इस चोर मंडली के अध्यक्ष और कोई नहीं स्वयं कन्हैया थे। एक बार की बात है कान्हा अपनी टोली के साथ तैयार हुए और योजना बनाई “चिकसोले वाली” गोपी के घर माखन चोरी करने की। कन्हैया और उनकी टोली गोपी के घर पहुंचे। कन्हैया ने गोपी के घर पहुँच कर अपने साथियों को छिपा दिया। और स्वयं दरवाजे पर पहुँच कर जोर जोर से द्वार खटखटाने लगे। जब गोपी ने द्वार खोल तो कान्हा को खड़े देखकर पूछा, " कान्हा, सवेरे-सवेरे यहां कैसे?
कान्हा बोले, "मैया ने भेजा है कि चिकसोले वाली गोपी के घर जाओ। हमारे घर में कोई संत महात्मा आए हैं और अभी घर में ताज़ा माखन नहीं निकाला है। मैया ने कहा है कि आप भोर में उठकर माखन निकाल लेती हो तो एक मटकी माखन दे दो, बदले में दो मटकी माखन लौटा दूँगी।"
गोपी बोली। कान्हा मैया से कह देना कि लौटाने की जरुरत नहीं है संतो की सेवा मेरी तरफ से हो जाएगी। गोपी झट से अंदर गयी और माखन की मटकी के साथ कान्हा को मिश्री भी दी। कान्हा की प्रसन्नता की सीमा नहीं थी। वह माखन लेकर बाहर आए और जैसे ही गोपी ने द्वार बंद किए कान्हा ने अपने सभी दोस्तों को बुलाया और कहा जिसके यहां चोरी की है उसके दरवाजे पर बैठकर खाने में एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है और फिर यह चोरी नहीं कहलाती।" इतना कहते ही सब चिकसोले वाली गोपी के दरवाजे के बाहर बैठ गए। सभी सखा माखन और मिश्री खाने लगे। माखन मिश्री के खाने की आवाज जब गोपी के कानों में पड़ी तब उन्हें लगा कहीं घर में बंदर तो नहीं आ गए। गोपी ने जैसे ही दरवाजा खोला उन्हें कान्हा अपनी मित्र मंडली के साथ माखन खाते दिखे। उन्हें देखते ही जैसे ही गोपी उन्हें डंडे से मारने के लिए दौड़ी कान्हा बोले बहुत हुआ माखन खाना अब जल्दी से भागोसभी अपने-अपने घर को। कान्हा के इतना कहते ही [ऊरई टोली सरपट भागी और चिकसोली वाली गोपी उन सभी को मुंह बाये देखती रह गई।