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Holi 2025: होलिका दहन पर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें ये चीज, मिलते हैं शुभ फल

Wed, 12 Mar 2025 01:25 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन के दौरान कुछ विशेष परंपराओं का पालन करने से धार्मिक लाभ के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी प्राप्त होते हैं।
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होलिका दहन - फोटो : adobe stock
Holi 2025: होली का पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो आपसी प्रेम और सौहार्द्र को बढ़ावा देता है। इस अवसर पर लोग पुरानी गलतफहमियों को भुलाकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं और उल्लासपूर्वक रंगों का त्योहार मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन किया जाता है, जिसे छोटी होली भी कहा जाता है। यह त्योहार अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक भी माना जाता है।

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होलिका दहन और उसके लाभ - फोटो : adobe stock
होलिका दहन और उसके लाभ
ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन के दौरान कुछ विशेष परंपराओं का पालन करने से धार्मिक लाभ के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी प्राप्त होते हैं। इस दिन विशेष रूप से बड़कुल्ले की माला, किशमिश, छुहारा, बादाम, सूखा नारियल, गन्ना और गेहूं की बालियों को होलिका की अग्नि में भूनकर खाने का धार्मिक महत्व होता है। इसके पीछे यह मान्यता है कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है और मौसमी बीमारियों से बचाव में सहायक होता है।
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होलिका दहन और उसके लाभ - फोटो : Adobe Stock
होलिका दहन के दौरान गेहूं की बालियां भूनकर खाने की परंपरा बहुत पुरानी है। विद्वानों के अनुसार, यह प्रथा सदियों से चली आ रही है, जिसमें गाय के गोबर से बनी बड़कुल्ले की माला होलिका में चढ़ाई जाती है। इसके साथ ही गन्ना, किशमिश, छुहारा, बादाम, सूखा नारियल और गेहूं की बालियों को भूनने से माना जाता है कि यह शरीर को मौसम परिवर्तन के प्रभाव से बचाने में सहायक होता है।

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होलिका दहन और उसके लाभ - फोटो : amar ujala
इसके अलावा इस परंपरा के माध्यम से यह भी प्रार्थना की जाती है कि अन्न का भरपूर उत्पादन हो और पृथ्वी पर सभी जीवों को भोजन प्राप्त हो। होलिका दहन से एक या दो दिन पहले खेत से गेहूं की बालियां उखाड़ी जाती हैं और सुखाने के बाद इन्हें होली की अग्नि में भूना जाता है।
 
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प्रसाद के रूप में वितरण - फोटो : Adobe Stock
प्रसाद के रूप में वितरण
जब होली की अग्नि में गेहूं की बालियां अच्छी तरह भुन जाती हैं, तो इन्हें परिवार, मित्रों और परिचितों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस परंपरा के पीछे यह भावना होती है कि सभी स्वस्थ रहें और उन्हें अन्न की कोई कमी न हो। धार्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि इस दिन गेहूं की बालियां भूनकर खाने से आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों तरह के लाभ मिलते हैं।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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