होली 2021
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होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी मनाई जाती है। इस दिन लोग जमकर पानी और रंगो से होली खेलते हैं। धुलेंडी को धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन और चैत बदी आदि नामों से जाना जाता है। आज के समय में धुलेंडी का त्योहार एक दूसरे पर रंग और अबीर गुलाल डालकर मनाया जाता है, लेकिन पहले के समय में धुलेंडी का त्योहार बहुत ही अलग तरह से मनाया जाता था। उसी पंरपरा के नाम पर इस दिन को धुलेंडी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग के आरंभ में भगवान विष्णु धूलि वंदन किया था। तभी से इस दिन धूलिवंदन यानि एक दूसरे पर धूल लगाने की पंरपरा शुरू हुई। एक दूसरे पर धूल लगाने के कारण ही इस दिन को धुलेंडी कहा जाता है।