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Holi 2019: बरसाना की लट्ठमार होली का अंदाज, जानिए कैसे और क्यों खेली जाती है ऐसी होली

Wed, 13 Mar 2019 12:18 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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इस बार देश भर में होली 21 मार्च 2019 को मनाई जाएगी लेकिन होली का उत्सव भगवान कृष्ण और राधा की नगरी मथुरा, वृंदावन, ब्रज और बरसाने में कई दिन पहले से ही मनाई जाती है। जिसमें बरसाने की लट्ठमार होली का अंदाज ही बहुत निराला होता है। यहां पर लोग रंगों के अलावा लट्टमार होली खेलते हैं। बरसाने की लट्ठमार होली को देखने के लिए देश-विदेश से कई लोग आते हैं। आइए जानते हैं बरसाने की लट्ठमार होली की परंपरा और महत्व...
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बरसाने का लट्ठमार होली न सिर्फ देश में मशहूर है बल्कि पूरी दुनिया में भी काफी प्रसिद्ध है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को बरसाने में लट्ठमार होली मनाई जाती है। नवमी के दिन यहां का नजारा देखने लायक होता है। यहां लोग रंगों, फूलों के अलावा डंडों से होली खेलने की परंपरा निभाते है। 
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बरसाना में राधा जी का जन्म हुआ था। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को नंदगांव के लोग होली खेलने के लिए बरसाना गांव जाते हैं। जहां पर लड़कियों और महिलाओं के संग लट्ठमार होली खेली जाती है। इसके बाद फाल्गुन शुक्ल की दशमी तिथि पर रंगों की होली खेली होती है।

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लट्ठमार होली खेलने की परंपरा भगवान कृष्ण के समय से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने दोस्तों संग नंदगांव से बरसाना जाते हैं। बरसाना पहुंचकर वे राधा और उनकी सखियों संग होली खेलते हैं। इस दौरान कृष्णजी राधा संग ठिठोली करते है जिसके बाद वहां की सारी गोपियां उन पर डंडे बरसाती है।
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गोपियों के डंडे की मार से बचने के लिए नंदगांव के ग्वाले लाठी और ढ़ालों का सहारा लेते हैं। यही परंपरा धीरे-धीरे चली आ रही है जिसका आजतक पालन किया जा रहा है। पुरुषों को हुरियारे और महिलाओं को हुरियारन कहा जाता है। इसके बाद सभी मिलकर रंगों से होली का उत्सव मनाते है।
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