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Hindu nav varsh 2026: कब शुरू होगा हिंदू नववर्ष? जानें रौद्र संवत्सर में कौन से ग्रह होंगे राजा और मंत्री

Wed, 04 Mar 2026 01:08 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hindu Nav Varsh 2026: वर्ष 2026 में आरंभ होने वाला हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 होगा, जिसे ‘रौद्र संवत्सर’ के नाम से जाना जाएगा। आइए जानते हैं कि विक्रम संवत 2083 कब शुरू होगा।
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हिंदू नववर्ष 2026 - फोटो : Amar Ujala
Vikram Samvat 2083 Start Date: हिंदू नववर्ष की शुरुआत हर वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मानी जाती है। वर्ष 2026 में आरंभ होने वाला नया वर्ष विक्रम संवत 2083 होगा, जिसे ‘रौद्र संवत्सर’ के नाम से जाना जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह नववर्ष 19 मार्च 2026 से प्रारंभ होगा। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में गुड़ी पाड़वा का पर्व भी मनाया जाएगा। इस प्रकार यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

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नए वर्ष में कौन होगा राजा और कौन मंत्री? - फोटो : Amar Ujala
कौन से ग्रह होंगे राजा’ और ‘मंत्री?
हिंदू नववर्ष में ‘राजा’ और ‘मंत्री’ का निर्धारण उस वार के आधार पर किया जाता है, जिस दिन से नया संवत आरंभ होता है। वर्ष 2026 में नववर्ष 19 मार्च, गुरुवार को प्रारंभ हो रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरुवार होने के कारण इस वर्ष के राजा ‘गुरु’ ग्रह माने जाएंगे। वहीं मंत्री पद ‘मंगल’ ग्रह को प्राप्त होगा। ग्रहों की यह स्थिति पूरे वर्ष के घटनाक्रम और वातावरण पर विशेष प्रभाव डालने वाली मानी जाती है।
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क्या है रौद्र संवत्सर? - फोटो : Adobe Stock
क्या है रौद्र संवत्सर?
विक्रम संवत 2083 का नाम ‘रौद्र’ रहेगा। हिंदू ज्योतिष में प्रत्येक वर्ष का एक विशिष्ट नाम होता है, जो उसके संभावित स्वभाव और परिणामों का संकेत देता है। इस बार नववर्ष का आरंभ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में होगा और उस समय शुक्ल योग के साथ मीन लग्न रहेगा। ‘रौद्र’ शब्द का अर्थ तीव्र या उग्र प्रवृत्ति से जुड़ा माना जाता है। इसी आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि वर्ष के दौरान प्राकृतिक, सामाजिक या राजनीतिक स्तर पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

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विक्रम संवत के अनुसार ऐसा होगा 2026 - फोटो : Amar Ujala
कैसा रहेगा यह वर्ष?
शास्त्रों में वर्णित संकेतों के अनुसार रौद्र संवत्सर में वर्षा सामान्य से कम हो सकती है। इसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे अनाज और आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अतिरिक्त अग्नि संबंधी घटनाएं, प्राकृतिक आपदाएं और राजनीतिक अस्थिरता जैसी स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। देशों के बीच तनाव, विरोध या संघर्ष की स्थिति बनने की आशंका भी ज्योतिषीय गणनाओं में व्यक्त की जाती है। हालांकि यह सभी संकेत संभावनाओं पर आधारित होते हैं, जिनका उद्देश्य सतर्कता और सजगता बनाए रखना है।
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हिंदू नववर्ष का महत्व - फोटो : Amar Ujala
हिंदू नववर्ष का महत्व
हिंदू नववर्ष मनाने के पीछे धार्मिक मान्यता भी जुड़ी है। ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। यह भी मान्यता है कि इसी तिथि से सतयुग का आरंभ हुआ था। बाद में सम्राट विक्रमादित्य ने अपने राज्य में इसी दिन से नए संवत्सर की गणना शुरू की। उनके नाम पर ही इस पंचांग को विक्रम संवत कहा गया। तभी से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू नववर्ष के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है।


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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